भारतीय संस्कृति संस्कार देने वाली संस्कृति

एमआईटी ‌‘सांस्कृतिक संध्या" के उद्घाटन अवसर पर डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा

    01-Jan-2026
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लोणी कालभोर, 31 दिसंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

भारतीय संस्कृति संस्कार प्रदान करने वाली संस्कृति है. यहां की मसांस्कृतिक संध्याफ संगीत की साधना के माध्यम से मशांत रसफ की अनुभूति कराती है और ईेशरीय दर्शन कराती है. आज जब युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति को भूलती जा रही है, तब उनमें इस संस्कृति को पुनर्जीवित करने और जड़ें जमाने के लिए संगीत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. नए साल में प्रवेश करते समय हम अपनी संस्कृति का संरक्षण कर रहे हैं, यह एक अद्वितीय और आनंदमयी क्षण है, ऐसे विचार एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. वेिशनाथ दा. कराड ने व्यक्त किए. वे वेिशशांति केंद्र (आलंदी) और माईर्स एमआईटी द्वारा लोणी कालभोर के वेिशराज बंधारा, वेिशशांति गुरुकुल (राजबाग) में आयोजित दो दिवसीय मएमआईटी सांस्कृतिक संध्याफ संगीत महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे. इस अवसर पर प्रियंका बर्वे और सारंग कुलकर्णी मुख्य अतिथि के रूप में साथ ही डॉ. मंगेश तु. कराड, पं. उद्धव बापू आपेगावकर, डॉ. मुकेश शर्मा और डॉ. संजय उपाध्ये भी उपस्थित रहे. प्रमुख अतिथि प्रियंका बर्वे ने कहा, डॉ. वेिशनाथ कराड ने संगीत और कला प्रेमियों के लिए बहुत बड़ा कार्य किया है. वर्ष 2025 की विदाई और नए साल का स्वागत हम शास्त्रीय संगीत (क्लासिकल) के साथ कर रहे हैं, यह बेहद सुंदर है. सारंग कुलकर्णी ने कहा, मसांस्कृतिक संध्याफ की यह अवधारणा अपने आप में अनूठी है. एमआईटी ने जो परंपरा शुरू की है, उससे दुनिया भर में एक अलग पहचान बनेगी. संगीत महोत्सव की शुरुआत सुप्रसिद्ध शहनाई वादक तुकाराम दैठणकर के शहनाई वादन से हुई. उद्घाटन के बाद अदिति रिसवड़कर ने कथक नृत्य की प्रस्तुति दी. इसके पश्चात वरिष्ठ वायलिन वादक सारंग कुलकर्णी ने अपने वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. वेिशशांति कला अकादमी के महासचिव आदिनाथ मंगेशकर ने स्वागत भाषण दिया. कार्यक्रम का संचालन स्नेहा वाघटकर ने किया और वेिशशांति संगीत कला अकादमी की कार्यकारी निदेशिका प्रो. ज्योति कराड-ढाकणे ने आभार व्यक्त किया.