नया आयकर अधिनियम : एक बड़ा सुधार

कर दाताओं के लिए अब कानून अधिक स्पष्ट और समझने में आसान हुआ

    10-Jan-2026
Total Views |
 
ngngh
 
नए अधिनियम में भाषा और संरचना को काफी सरल किया गया है. धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी गई है. कई प्रावधानों को तालिकाओं और सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है तथा पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटा दिया गया है, जिससे कानून अधिक स्पष्ट और समझने में आसान बन गया है. संसद ने आयकर अधिनियम, 2025 को पारित किया है, जो देश के प्रत्यक्ष कर कानूनों में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है. यह नया अधिनियम छह दशक पुराने आयकर अधिनियम, 1961 का स्थान लेगा और 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा. यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ और अगस्त 2025 में राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई्‌‍. यह सुधार भारत की कर व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य कर कानूनों को सरल, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाना है. इस अधिनियम का एक प्रमुख परिवर्तन कर वर्ष की अवधारणा की शुरुआत है, जिसने पुराने पूर्व वर्ष और आकलन वर्ष की जटिल व्यवस्था को समाप्त कर दिया है. इससे आय अर्जन और कर गणना की प्रक्रिया अधिक सरल और सहज हो गई है, जिससे कर अनुपालन आसान होगा. हालांकि, इस अधिनियम में आयकर दरों में कोई प्रत्यक्ष बदलाव नहीं किया गया है. कर दरें और स्लैब पहले की तरह वार्षिक वित्त अधिनियम के माध्यम से निर्धारित किए जाएंगे. नए अधिनियम में भाषा और संरचना को काफी सरल किया गया है. धाराओं की संख्या 819 से घटाकर 536 और अध्यायों की संख्या 47 से घटाकर 23 कर दी गई है. कई प्रावधानों को तालिकाओं और सूत्रों के रूप में प्रस्तुत किया गया है तथा पुराने और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटा दिया गया है, जिससे कानून अधिक स्पष्ट और समझने में आसान बन गया है. सरकार का कहना है कि यह व्यापक सुधार व्यक्तियों और व्यवसायों दोनों के लिए कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और अनुपालन-अनुकूल बनाएगा. नए कानून में फेसलेस आकलन, इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग और तेज विवाद निवारण पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि मुकदमेबाजी कम हो और करदाताओं का अनुभव बेहतर हो सके. इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल परिसंपत्तियों के कराधान के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए ह्‌ैं‍. व्यक्तिगत करदाताओं के लिए उच्च रिबेट सीमा, वेतनभोगियों के लिए मानक कटौती तथा वेतन, मकान संपत्ति और पूंजीगत लाभ से आय के नियमों को अधिक स्पष्ट किया गया है.   
- CA अमोल दातार, पुणे