एआई के दुरुपयाेग काे लेकर समाज की चिंता बढ़ गई है?

    13-Jan-2026
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दुष्परिणामाें पर पाेथा लिखा जा चुका है. लेकिन साल 2026 की शुरुआत से हुई नई तकनीक के पुराने दुरुपयाेग से.यानी महिलाओं के चित्राें पर से कपड़े हटवाना और उनकाे बिकिनी पहना देना. यह सिर्फ हिंदुस्थान में नहीं, पूरी दुनिया में हाेने लगा और इस बार इस सामाजिक विकृति के पीछे था एलन मस्क का नया खिलाैना ग्राेक एक आई और ट्वीटर का नया अवतार ए्नस.ए्नस पर पिछले कुछ दिनाें से लगातार महिलाओं की तस्वीरे डाली जा रही हैं और उस पर लिखा जा रहा है कि ग्राेक अपनी तकनीक का प्रयाेग रही हैं और उस पर लिखा हि रहा है कि ग्राेक अपनी तकनीक का प्रयाेग करके महिलाओं के कपड़े हटा दे और महिलाओं काे बिकिनी पाेशाक पहना दे और ग्राेक यह कर भी रहा है. शुरुआत में ताे यह खेल जैसा ही लगा, पर कुछ ही पल में इसके दुरुपयाेग काे लेकर समाज में सिर्फ चिंता ही पैदा हुई, बल्कि इस दुरुपयाेग काे देखा भी गया.
 
पहले बताया गया कि महिलाएं खुद ही अपनी तस्वीराें काे बिकिनी में देखना चाहती हैं. बाद में कमेंट्स में लाेग अपने हिसाब से महिलाओं की तस्वीराें के वस्त्र बदलने लगे.दुनिया भर में हल्ले के बाद ट्विटर के नए मालिक एलन मस्क ने संज्ञान ताे लिया है, लेकिन वह अधूरा है. वह कहते है कि ग्राेक का दुरुपयाेग करने वालाें के साथ वही हाेगा, जाे बाकी अवैध सामग्री डालने वालाें के साथ हाेता है. मगर आगे सुनिए वह यह भी कहते हैं कि इन सबके लिए ग्राेक जिम्मेदार नहीं है. बल्कि उसका इस्तेमाल करने वाले लाेग हैं. कलम से कुछ खराब लिख दिया जाए ताे दाेष कलम का नहीं हाेता, लिखने वाले का हाेता है. सतही रूप से देखें ताे बात तार्किक लगेगी लेकिन कलम का उदाहरण गलत है कलम अपना दिमाग नहीं लगाती ग्राेक एक भाषा सीखने का माॅड््यूल है.
 
वह खुद दिमाग लगाता है, इसलिए पाप में भागीदार भी है और मस्क यह न भूलें कि दुरुपयाेग राेकना भी उन्हीं की जिम्मेदारी है. एक बड़ा सवाल हमारे समाज और हमारी सरकार से भी है. यह हम हाेने कैसे दे रहे हैं? ्नया तकनीक के नाम पर हम कुछ भी स्वीकार कर लेंगे? साेचिए जरा, आज यह किसी अनजान महिला की तस्वीर है, जिसे आप वस्त्रहीन हाेते देख रहे हैं. कल अगर किसी ने आपकी या आपके परिवार की किसी महिला सदस्य की तस्वीर के साथ ऐसा कर दिया,ताे? जब तक आप यह साबित करेंगे कि यह डीपफेक एआई छवी है, तब तक की समाज के लाेग उन चीजाें की कल्पना कर चुके हाेंगे, जाे सभ्य समाज काे नागवार गुजरना चाहिए. आज ग्राेक है, कल काेई और एआई.पिछले वर्ष एक बड़ा बवाल तब उठ खड़ा हुआ था,जब अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियाे सामने आया.
 
लंदन की किसी माॅडल के तंग कपड़ाें के वीडियाे पर रश्मिका की तस्वीर डाल दी गई.बवाल हुआ.अमिताभ बच्चन तक हैरान हुए. तब भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दुरुपयाेग क चर्चा तेज हुई थी. मुझे याद है, मैंने पिछले कई वर्षाें से एआई के भयानक दुरुपयाेग पर तमाम स्टाेरी कीं. जैसे इसके कई एप, जाे किसी भी दाे तस्वीर काे या ताे गले लगवा देंगे,या उनसे मार-काट करवा देंगे. याद कीजिए आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का भीमराव आंबेडकर के साथ का एक वीडियाे, जिसमें आंबेडकर उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं.लेकिन फिर कुछ ही घंटाें में एक और वीडियाे सामने आया, जिसमें आंबेडकर केजरीवाल काे थप्पड मारते हुए दिखाई देते हैं. ऐसे कई उदाहरण हैं. पर एक एआई के एप े ताे मुझे हिला कर रख दिया. इसमें पैसे देकर आप किसी भी दे तस्वीराें काे चुंबन करवा सकते हैं. और यह सब खुलेआम हाे रहा है. ऐसे एप अपना प्रचार भी करते है.
 
एक दाैर था फाेटाेशाॅप का, जब यही चीज करने के लिए कंम्प्यूटर साॅफ्टवेयर एडाेब फाेटाेशाॅप की जरुरत पड़ती थी.समाज में महिलाओं के सम्मान का मखाैल आज से नहीं उड़ रहा. लेकिन ए्नस पर फैल रही खुली नग्नता इसलिए ज्यादा चिंताजनक और परेशान करने वाली बात है, क्योंकि जाे चीज अब तक पर्दे के पीछे ही हाे रही थी, अब वह बहुत तेजी से बेराेकटाेक व खुलेआम हाे रही है. कुछ सेकड़ाें में हाे रही है और चूंकि यह सब साेशल मीडिया ए्नस पर उपलब्ध है, ताे तेजी से फैल भी रही है. यह डिजिटल दुराचार से कम नहीं.समाज में कुछ लाेग मानसिक रूप से बीमार हैं. ऐसे एप उस बीमारी काे और बढ़ावा दे रहे हैं.एआई जैसी तकनीक से हमेशा दाे कदम आगे रहना कठिन है. लेकिन नामुमकिन भी नहीं. इस क्षेत्र में बहुत शाेध हाे रहा है और हम (सरकार तथा सरकार के बाहर) इन पर चर्चा कर भी रहे हैं.
 
लेकिन व्नत है तेजी से काम करने का इन सब मामलाें में इंतजार घातक हाे सकता है. हमारे देश के माैजूदा कानून महिला सम्मान की रक्षा करने में सक्षम हैं.ए्नस में जाे समस्या है. वही समाधान भी है. काैन ग्राेक से सवाल पूछ रहा है और काैन नग्नता फैला रहा है, यह सब खुले में हाे रहा है.ऐसे ए्नस हैंडल्स के खिलाफ देश के कानून प्रर्वतन तंत्र तुरंत हरकत में आ सकते हैं जब कार्रवाई त्वरित हाेगी.ताे ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लाेगाें में कानून का डर बनेगा. घटिया मानसिकता रखने वाले लाेगाेें काे यह जताना बहुत जरुरी हाे गया है कि महिलाओं का स्ममान करना काेई विकल्प नहीं है. बल्कि अनिवार्य है. कम से कम हरेक नागरिक से इतना ताे अपेक्षित ही है कि वह महिलाओं का सम्मान करे. अच्छी बात यह है कि सरकार ने मामले की गंभीरत काे समझा है.बीते दाे जनवरी काे इले्नट्राॅन्निस और आईटी मंत्रालय ने ए्नस काे एक चिट्ठी भेजी. - संकेत उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार