देश के नागरिकों को सजग रहना बेहद जरूरी : रिटा. ले. ज. राजेंद्र निम्भोरकर

    14-Jan-2026
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पुणे, 13 जनवरी (आ. प्र.)
 
हमारे देश को मुख्य रूप से ढाई शत्रुओं का सामना करना पड़ता है. इनमें से दो चीन और पाकिस्तान हैं, जिनसे मुकाबला करने में हमारा सैन्य सक्षम है. लेकिन आधा शत्रु हमारे देश के भीतर ही है. उनसे मुकाबला करने के लिए देश के प्रत्येक जागरूक नागरिक को सजग रहना आवश्यक है ,यह विचार लेफ्टिनंट जनरल राजेंद्र निम्भोरकर (सेवानिवृत्त) ने व्यक्त किए. पानीपत रणसंग्राम स्मृति समिति तथा शनिवारवाड़ा चौक मित्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान में पानीपत रणसंग्राम स्मृति दिवस का 265वां वर्ष रविवार (11 जनवरी) को याज्ञवल्क्य आश्रम, कसबा पेठ, पुणे में आयोजित किया गया था. कार्यक्रम की प्रस्तावना इतिहास संशोधक पांडुरंग बलकवडे ने की. उन्होंने अपने अभ्यासपूर्ण भाषण में पानीपत के युद्ध का देश के इतिहास पर पड़े प्रभावों का विवेचन किया. पूर्व आईएएस अधिकारी अविनाश धर्माधिकारी ने पानीपत के इतिहास को श्रोताओं के समक्ष प्रस्तुत किया. लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राजेंद्र निम्भोरकर के करकमलों से ले.जनरल सुदर्शन हसबनीस को सदाशिवरावभाऊ पेशवा पुरस्कार, कर्नल प्रसाद पुरोहित को वीर योद्धा दत्ताजी शिंदे पुरस्कार, तथा धर्माधिकारी के करकमलों से कसबा पेठ के सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश कृष्णकांत पोटफोडे को कसबा भूषण पुरस्कार प्रदान किया गया. कर्नल प्रसाद पुरोहित ने कहा कि महाराष्ट्र ऐसा प्रदेश है जहां भक्ति और शौर्य का अद्भुत संगम हुआ है, इसी कारण महाराष्ट्र ने देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ले. जनरल सुदर्शन हसबनीस ने बताया कि पानीपत में वीरगति को प्राप्त दत्ताजी शिंदे और वेिशासराव पेशवा मात्र 20 वर्ष के थे, जबकि नेतृत्व करने वाले सदाशिवराव भाऊ पेशवा केवल 32 वर्ष के थे. इतनी कम उम्र में उन्होंने महान कार्य किए. लेखिका भाग्यश्री समेल का विशेष सम्मान किया गया. श्रीहर्ष सगरे ने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया तथा जितेंद्र निजामपुरकर ने आभार प्रदर्शन किया. राजीव आयाचीत, अजय सातपुते, स्वप्निल कत्तुर, भरत हजारे, मुकुंद पाटोळे, कुंदन तांबट, दुर्गेश निजामपुरकर, राकेश निजामपुरकर, विजय जाधव इन सभी ने कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु विशेष परिश्रम किया.