प्राइवेट अस्पतालाें में लूट का सिलसिला जारी

    15-Jan-2026
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Hospital 
प्राइवेट अस्पतालाें में कैसी व्यवस्था है, ये किसी से छिपा नहीं है. यह भी सभी जानते हैं कि ज्यादातर निजी अस्पतालाें में इलाज के नाम पर मरीजाें के परिजनाें से लूट खसाेट की जाती है. लेकिन बीते दिनाें देश के अलग-अलग शहराें में प्राइवेट अस्पतालाें का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जाे मानवता काे शर्मसार करने वाला है.लखनऊ में 35 वर्षीय नीरज मिश्रा तीन साल पहले बैटरी रिक्शा दुर्घटना में घायल हाे गए थे. इलाज के लिए वे एक निजी हाॅस्पिटल पहुंचे, जहां गलत सर्जरी के बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई. इलाज के नाम पर उनसे बार-बार पैसे जमा कराए गए. अंततः एक अन्य प्राइवेट अस्पताल में उन्हें 9 से 10 सर्जरी करानी पड़ीं. एक पैर की हालत बिगड़ने पर दूसरे पैर से मांस प्रत्याराेपित किया गया, जिससे दाेनाें पैर कमजाेर हाे गए और नीरज चलने-फिरने में असमर्थ हाे गए. नीरज पर करीब 21 लाख रुपये का कर्ज हाे गया.ग्रेटर नाेएडा के महानंदन हाॅस्पिटल में फिराेजाबाद के जयदेव सिंह का मामला और भी चाैंकाने वाला है.
 
ब्रेन हैमरेज के बाद इलाज के नाम पर करीब 30 लाख रुपये वसूले गए. जमीन बिक गई, कर्ज चढ़ गया, लेकिन मरीज नहीं बचा. 7 जनवरी काे माैत के बाद भी अस्पताल ने तीन लाख रुपये बकाया बताकर शव साैंपने से इनकार कर दिया. पुलिस हस्तक्षेप के बाद अस्पताल ने परिजनाें काे शव साैंपा.भाेपाल के जिंदल अस्पताल में भी अत्यधिक शुल्क वसूली का मामला सामने आया है. नितेश यादव के परिवार ने आराेप लगाया कि उनकी 24 वर्षीय बहन शालू यादव काे मामूली पैर की चाेट के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दाैरान उनकी माैत हाे गई. परिवार का कहना है कि भर्ती के समय अस्पताल ने 40,000 रुपये का अग्रिम जमा करने काे कहा और दावा किया कि पैर का छाेटा ऑपरेशन किया जाएगा, जबकि चाेट केवल सूजन की थी.