शरीर पर पांच कराेड़ रुपये का साेना, सिर पर चांदी का मुकुट !

    17-Jan-2026
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संगम तट पर लगे माघ मेले में इस बार साधु-संताें और कल्पवासियाें के बीच गूगल गाेल्डन बाबा आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. अपने अनाेखे पहनावे, भारी मात्रा में साेने-चांदी के आभूषण और धार्मिक संकल्पाें के कारण गूगल गाेल्डन बाबा इन दिनाें माघ मेले में पहुंचे हैं. साधारण वस्त्राें और सादगी के लिए पहचाने जाने वाले संत समाज के बीच बाबा का यह भव्य स्वरूप लाेगाें काे चाैंका भी रहा है.गूगल गाेल्डन बाबा का असली नाम मनाेज आनंद महाराज है और वे कानपुर के रहने वाले हैं. बाबा का दावा है कि वे शरीर पर सिर से लेकर पांव तक करीब 5 कराेड़ रुपये कीमत का साेना और चांदी धारण किए हुए हैं. बाबा अपने दाेनाें हाथाें में साेने के भारी कंगन और चेन, पांचाें उंगलियाें में अलग-अलग देवी-देवताओं की आकृतियाें वाली साेने की अंगूठियां, गले में साेने-चांदी का शंख पहनते हैं.
 
इसी के साथ रुद्राक्ष की मालाओं में भी साेना जड़ा है.इतना ही नहीं, गूगल गाेल्डन बाबा चांदी के बर्तन में भाेजन करते हैं और पानी भी चांदी के पात्र में ही पीते हैं.उनके सिर पर चांदी का मुकुट हबाबा बताते हैं कि पहले वे लगभग पांच लाख रुपये की लागत वाली चांदी की चप्पल पहनते थे, लेकिन अब उन्हाेंने वह चप्पल छाेड़ दी है. इसके पीछे एक खास संकल्प है. गूगल गाेल्डन बाबा का कहना है कि उन्हाेंने यह प्रण लिया है कि जब तक याेगी आदित्यनाथ देश के प्रधानमंत्री नहीं बन जाते, तब तक वे नंगे पांव ही चलेंगे. बाबा मानते हैं कि यह उनका व्यक्तिगत संकल्प और आस्था है, जिसे वे पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. गूगल गाेल्डन बाबा कराैली वाले बाबा के भक्त हैं और बीते करीब 20 वर्षाें से साेने-चांदी के आभूषण धारण कर रहे हैं.
 
बाबा के पास एक खास लड्डू गाेपाल की मूर्ति भी है, जाे पूरी तरह साेने की बनी हुई है. बाबा इस मूर्ति काे हमेशा अपने हाथ में थामे रहते हैं. उनका कहना है कि उन्हें अपने साेने के आभूषणाें के खाेने या चाेरी हाेने का काेई डर नहीं है, क्याेंकि उनके असली रक्षक यही लड्डू गाेपाल हैं. साेना पहनने काे लेकर पूछे गए सवाल पर बाबा कहते हैं कि वे क्षत्रिय हैं और उनके पूर्वज भी साेना धारण करते थे. उनके अनुसार साेना शाैर्य, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक रहा है, इसलिए वे भी इसे धारण करते हैं. बाबा मानते हैं कि साेना उनके लिए दिखावा नहीं, बल्कि परंपरा और आस्था का हिस्सा है.