शिवाजीनगर, 19 जनवरी (आ. प्र.) नेत्र सेवा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक आने के बावजूद, दुर्भाग्य से आज भी दृष्टिहीनों की संख्या नियंत्रित नहीं है. दृष्टि से संबंधित कई समस्याएं ऐसी होती हैं जिनका उपचार संभव है. हालांकि, जानकारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अभाव में मनुष्य जीवन भर के लिए दृष्टि खो देता है, यह अत्यंत खेदजनक है. सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के कुलाधिपति डॉ. एस. बी. मुजुमदार ने प्रतिपादित किया कि दृष्टिहीनता की समस्या का सामना करना हमारा सामाजिक कर्तव्य है. वे पुणे नेत्रसेवा राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर बोल रहे थे. पुणे नेत्रसेवा प्रतिष्ठान की ओर से प्रतिवर्ष ये पुरस्कार दिए जाते हैं. इस वर्ष संस्थागत पुरस्कार पूना ब्लाइंड मेन्स एसोसिएशन का एच. वी. देसाई आई हॉस्पिटल को तथा व्यक्तिगत पुरस्कार मुंबई के प्रो. डॉ. अमूल्य साहू को प्रदान किया गया. पूना ब्लाइंड मेन्स एसोसिएशन के एच. वी. देसाई आई हॉस्पिटल के कार्याध्यक्ष नितिन देसाई ने पुरस्कार का स्वीकार किया. देसाई आई हॉस्पिटल के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम के अवसर पर मंच पर भारती विद्यापीठ (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के कुलाधिपति डॉ. शिवाजीराव कदम, पुणे नेत्रसेवा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. मधुसूदन झंवर, चेयरमैन डॉ. सतीश देसाई, सचिव डॉ. राजेश पवार, डॉ. संपत पंगुलिया, कर्नल डॉ. मदन देशपांडे, पूना ब्लाइंड मेन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश शाह और परवेज बिलिमोरीया उपस्थित थे. डॉ. शिवाजीराव कदम ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी समाज में नेत्रदान के प्रति पर्याप्त सजगता और जागरूकता नहीं है. इस कारण ईेशर द्वारा दी गई मआंखोंफ जैसी अनमोल देन मिट्टी में मिल रही है. स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ-साथ पूना ब्लाइंड मेन्स एसोसिएशन और एच. वी. देसाई आई हॉस्पिटल जैसी संस्थाओं को नेत्रदान के प्रति समाज में जागरूकता पैदा करना आवश्यक है.