अजित दादा को श्रद्धांजलि देने शहर पूरी तरह बंद : दुकानों पर ताले, सड़कें सूनी

उपमुख्यमंत्री और पुणे के पालकमंत्री अजितदादा पवार के बारामती क्षेत्र में हुए विमान हादसे में आकस्मिक निधन से पूरे पुणे शहर में शोक की लहर फैल गई है.अजितदादा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गुरुवार (29 जनवरी) को पुणेवासियों ने स्वयंस्फूर्त रूप से कड़ा बंद रखा.

    30-Jan-2026
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पुणे, 29 जनवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

उपमुख्यमंत्री और पुणे के पालकमंत्री अजितदादा पवार के बारामती क्षेत्र में हुए विमान हादसे में आकस्मिक निधन से पूरे पुणे शहर में शोक की लहर फैल गई है.अजितदादा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गुरुवार (29 जनवरी) को पुणेवासियों ने स्वयंस्फूर्त रूप से कड़ा बंद रखा. शहर की सभी व्यावसायिक पेठ, मुख्य सड़कें और बाजार पूरी तरह सूने नजर आए. आमतौर पर चहल-पहल से भरे रहने वाले पुणे में दिनभर सन्नाटे का माहौल देखने को मिला.शहर के मध्यवर्ती क्षेत्रों में लक्ष्मी रोड, महात्मा फुले मंडई, तुलसीबाग, बाजीराव रोड, तिलक रोड, कुमठेकर रोड, रविवार पेठ की बोहरी गली, भवानी पेठ का भुसार बाजार,  
 
टिंबर मार्केट पूरी तरह बंद रहा

टिंबर मार्केट परिसर की सभी दुकानें बंद रहीं. पुणे व्यापारी महासंघ के आह्वान पर मध्य पुणे सहित उपनगरों के व्यापारियों ने भी दुकानें और निजी कार्यालय बंद रखे. व्यापारी महासंघ के पदाधिकारी फत्तेचंद रांका और महेंद्र पितलिया ने व्यापारियों से बंद का पालन करने की अपील की थी. इसके साथ ही सातारा रोड, कात्रज, हड़पसर, कर्वेनगर, कोथरुड, धायरी, नऱ्हे, वारजे, येरवड़ा, विश्रांतवाड़ी और वाघोली क्षेत्रों में भी बंद देखा गया. पुणे कृषि उत्पन्न बाजार समिति के अंतर्गत आने वाला श्री छत्रपति शिवाजी गुलटेकड़ी मार्केटयार्ड पूरी तरह बंद रहा. थोक फल-सब्जी, फूल, गुड़-भुसार बाजार के साथ पान बाजार, केला बाजार, पशु बाजार, तौल केंद्र और पेट्रोल पंप विभाग के लेनदेन भी ठप रहे. मांजरी, मोशी, खड़की और उत्तमनगर स्थित उपबाजार भी बंद रहे. इसके कारण किसानों ने भी गुरुवार को कृषि उपज बिक्री के लिए नहीं भेजी. विभिन्न संस्थाओं, व्यापारी संगठनों और सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों की ओर से श्रद्धांजलि के फलक लगाए गए थे . शहर में नियोजित सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए . लोकप्रिय, मजबूत और विकासोन्मुख नेतृत्व के खोने की भावना से पुणेवासियों की आंखें नम थीं और दादा अभी बहुत कुछ करने वाले थे, ऐसी भावनाएं पूरे शहर में व्यक्त हो रही थीं .