जयपुर, 29 जनवरी (वि.प्र.) राजस्थान के जालाैर के एक गांव वालाें ने 4.50 कराेड़ का माॅडल स्कूल बनाकर और सरकार काे साैंपने की मिसाल कायम की. हालांकि यह स्कूल भवन अगले महीने सरकार काे गांव वाले सरकार काे साैंप देंगे.
फरवरी में उद्घाटन हाेगा. इससे पहले बच्चे बरामदे में बैठकर पढ़ते थे. इससे पहले वाले स्कूल में ताे बाथरूम तक नहीं था. हालांकि अब अगले महीने उद्घाटन हाेने के बाद स्कूल सुचारू रूप से चलने लगेगा और गांव के बच्चाें काे अब तकलीफ भी नहीं हाेगा.
गांव के बच्चाें के लिए स्कूल भवन छाेटा पड़ने लगा ताे ग्रामीणाें ने नई बिल्डिंग बनाने की मांग की. सरकार ने जमीन दी, लेकिन बजट अटक गया. हालात ऐसे थ कि बच्चाें काे बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी. बाथरूम तक नहीं था. ऐसे में गांव की सरपंच के ससुर और ग्रामीणाें ने मिलकर निर्णय लिया कि वे खुद के दम पर स्कूल बनाएंगे. स्कूल से पासआउट पुराने स्टूडेंट्स, प्रवासी और गांव के लाेगाें से करीब 4.50 कराेड़ चंदा इकट्ठा किया और बच्चाें के लिए भव्य स्कूल बना दिया.
जालाेर जिले से 18 किलाेमीटर दूर नरसाणा गांव में साढ़े चार साल में 21 कमराें और इंडाेर स्टेडियम के साथ यह सीनियर सेकेंडरी स्कूल बनकर तैयार है.
इसका फरवरी में उद्घाटन हाेगा. नरसाणा गांव की सरपंच दुर्गा कंवर के ससुर और पूर्व एडिशनल बीडीओ जसवंत सिंंह ने बताया- गांव के बीच में 100-100 वर्ग फीट जमीन पर स्कूल है. इसमें 7 कमरे हैं, जबकि स्टूडेंट 450 हैं. इन 7 कमराें में भी एक प्रिंसिपल का रूम और एक स्टाेर रूम है. 5 कमराें में स्टूडेंट पढ़ते है. अन्य बच्चाें की कक्षाएं बरामदे में लगती हैं. 15 साल से गांव के लाेग स्कूल के नए भवन की मांग कर रहे थे. ऐसे में सरकार ने एक बार एक रूम बनाकर दिया. लेकिन, साढ़े चार साल पहले जब बच्चाें की संख्या बढ़ने लगी ताे परेशानी भी बढ़ने लगी. हालात ये थे कि बाथरूम के लिए तक जगह नहीं थी. इसके बाद सरकार की ओर से 5 बीघा जमीन अलाॅट हाे गई, लेकिन निर्माण के लिए बजट अटक गया. ऐसे में साल 2021 में गांव के लाेगाें के साथ मंदिर में एक बैठक ली. प्रस्ताव रखा कि क्याें न गांव के लाेग चंदा इकट्ठा कर अपने स्तर पर स्कूल का निर्माण करवाएं. इस दाे मंजिला स्कूल में 21 कमरे और 2 बड़े हाॅल हैं. एक अंडरग्राउंड इंडाेर स्टेडियम है. छाेटे बच्चाें के लिए भी प्ले एरिया बनवाया है.