शिवाजीनगर , 30 जनवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) रविवार (1 फरवरी) को पेश होने वाला केंद्रीय बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन स्थापित करने की चुनौती के साथ आएगा. वैेिशक महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और तेज तकनीकी बदलावों के बीच भारत के सामने अवसर भी हैं और अपेक्षाएं भी. आर्थिक सर्वेक्षण सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत देगा, लेकिन कर सुधार, निवेश, विनिर्माण, निर्यात और हरित ऊर्जा इस बजट के प्रमुख स्तंभ बनने की संभावना है, ऐसी राय पुणे के प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट सुहास पी. बोरा ने रखी है. उन्होंने अपने कुछ सुझाव, विचार और अपेक्षाएं व्यक्त की हैं. क्या बजट 2026 भारत की आर्थिक उड़ान को नई ऊंचाई देगा..? क्या यह मध्यम वर्ग को राहत, उद्योगों को गति और निवेशकों को भरोसा दे पाएगा..? ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रही है, यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण नीति-संकल्प है. सीए सुहास बोरा ने कहा, नए आयकर कानून के 1 अप्रैल 2026 से लागू होने के कारण बड़े कर स्लैब बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है. सरकार का ध्यान कर प्रणाली को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर हो सकता है. महंगाई के प्रभाव को देखते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की उम्मीद है. वहीं 30% टैक्स स्लैब की सीमा बढ़ाने की मांग भी लगातार उठ रही है, जिससे करदाताओं की डिस्पोजेबल आय बढ़ सकती है. धारा 80उ की 1.5 लाख रुपये की सीमा पिछले एक दशक से अपरिवर्तित है; इसे बढ़ाने से बचत और निवेश दोनों को प्रोत्साहन मिलेगा. वरिष्ठ नागरिकों के लिए धारा 80इ की सीमा में वृद्धि, स्वास्थ्य बीमा कटौती में सुधार और होम लोन ब्याज पर अधिक छूट जैसे कदम उनकी वित्तीय सुरक्षा मजबूत कर सकते हैं. टीडीएस दरों को कुछ व्यापक श्रेणियों में समेटना, आयकर प्रावधानों का और अधिक डी- क्रिमिनलाइजेशन तथा विदेशी टैक्स क्रेडिट को टीडीएस स्तर पर समायोजित करने जैसे उपाय अनुपालन को आसान बना सकते हैं. यदि ङ्गविवाद से वेिशासफ जैसी एकमुश्त विवाद समाधान योजना फिर लाई जाती है, तो हजारों मामलों में फंसा राजस्व मुक्त हो सकता है और व्यवसायों को नई शुरुआत का अवसर मिलेगा. एमएसएमई के लिए सुलभ ऋण, मजबूत क्रेडिट गारंटी और छोटे शहरों तक वित्तीय सहायता की पहुंच भारत के विनिर्माण आधार को मजबूत करते हुए वैेिशक प्रतिस्पर्धा बढ़ा सकती है. सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय में 1015% वृद्धि कर इसे लगभग 1212.5 लाख करोड़ तक ले जाने की संभावना है. सड़क, रेल और शहरी विकास पर निवेश रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति देगा. वहीं, किफायती आवास की सीमा बढ़ाना, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस जैसे कदम रियल एस्टेट क्षेत्र को नई ऊर्जा दे सकते हैं.
दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की उम्मीद बजट 2026 से केवल कर राहत की नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती की उम्मीद है. एक ऐसा बजट जो कर प्रणाली को सरल बनाए, उद्योग और निर्यात को गति दे, नवाचार को प्रोत्साहित करे और सतत विकास सुनिश्चित करेवही भारत को वैेिशक मंच पर और सशक्त बना सकता है. अब पूरे देश की निगाहें 1 फरवरी पर हैं. यह बजट तय करेगा कि भारत की विकास यात्रा कितनी तेज, समावेशी और टिकाऊ होगी. - सीए सुहास पी. बोरा, संस्थापक, एसपीसीएम एंड एसोसिएट्स