बच्चाें की परवरिश प्रेम के परिवेश में कर

    31-Jan-2026
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इस शब्द ‘सहज’ काे खूब-खूब मंथन करना, चिंतन करना, ध्यान करना. यह शब्द बड़ा बहुमूल्य है. इस शब्द का अगर तुम्हें अर्थ-विस्ाेट हाे जाये ताे तुम्हारे जीवन में क्रांति हाे जायेगी. ‘सहज’का अर्थ है जाे तुम्हारे बिना किये अपने से हाेता है.
 
बहुत कुछ है जाे सहज हाे रहा है. उस पे भी तुम अपने काे आराेपित किये हाे. तुम कहते हाे, ‘मैं’. किसी से प्रेम हाे जाता है, तुम कहते हाे, ‘मैं प्रेम करता हूं.’ हाेता है.तत्क्षण तुम बदल देते हाे भाषा. तुम कहते हाे, करता हूं! किसी ने कभी प्रेम किया? सुना कभी तुमने कि किसी ने प्रेम किया? काेई प्रेम कर सकता है? अगर मैं तुम्हें आज्ञा दूं कि कराे प्रेम, तुम कर पाओंगे? तुम कहाेगे, यह भी काेई आज्ञा की बात है? यह काेई मेरे किये से हाेगा? हाेगा ताे हाेगा. नहीं हाेगा ताे नहीं हाेगा. हाेता ताे हाेता है. नहीं हाेता है, ताे नहीं हाेता है. जब हाे जाता है तब रुक नहीं जा सकता; और जब नहीं हाेता है तब किया नहीं जा सकता.
 
लेकिन िफर भी तुम प्रेम पर भी थाेप देते हाे अहंकार काे. तुम कहते हाे, मैंने किया प्रेम. तुम कहते हाे, मैं ताे प्रेम कर रहा हूं और तुम नहीं कर रहे हाे. और हम यही सिखाते भी हैं.
 
छाेटे-छाेटे बच्चाें काे भी मां कहती है, मुझे प्रेम कराे, मैं तुम्हारी मां हूं. क्या पागलपन की बात हाे रही है? काैन कर पाया प्रेम? बच्चे काे ताे छाेड़ दाे, बड़े नहीं कर पाये. बड़े-बड़े कुशल नहीं कर पाये. प्रेम काे कराेगे कैसे? काेई तुम्हारे हाथ की बात है? प्रेम काेई कृत्य ताे नहीं. लेकिन अगर बच्चे काे तुमने जाेर दिया कि कराे मुझे प्रेम, मैं तुम्हारी मां हूं, ताे बच्चे काे तुम एक ऐसी असमंजस में, ऐसे संकट में, ऐसी विडम्बना में डाल रहे हाे जिसका तुम्हें कुछ पता नहीं कि तुम क्या कह रहे हाे. छाेटा-सा बच्चा तड़फ ेगा; साेचेगा, कैसे कराे प्रेम! लेकिन करना ही पड़गा; क्याेंकि मां पर सब निर्भर है, दूध निर्भर है, जीवन निर्भर है. मां के सहारे ही बच सकता है बच्चा. बाप कहेगा, ‘मुझे प्रेम कराे, मैं तुम्हारा बाप हूं.
 
मैंने तुम्हें जन्म दिया! अब जन्म देने से काेई प्रेम का लेना-देना है? लेकिन बच्चा चेष्टा करेगा कि ठीक है; जब सब कहते हैं, बड़े बूढ़े कहते हैं ताे करना ही हाेगा. ताे झूठा मुस्कराएगा, झूठे पैर छूएगा, झूठी प्रसन्नता जाहिर करेगा. शुरू हुआ पाखंड! िफर जीवनभर ऐसे ही झूठ में जियेगा. िफर मर जायेगा और प्रेम की सहज उद्भावना से परिचित न हाे पायेगा. क्याेंकि पहले से ही प्रेम के मार्ग पर झूठ खड़ा हाे गया.
 
ना, मां इतना ही कर सकती है कि अगर उसे बच्चे के प्रति प्रेम है ताे करे प्रेम. अगर उस प्रेम के संघात में, अगर उस प्रेम के संसर्ग में बच्चे की सहजता भी प्रुल्लित हाे उठेगी ताे हाे उठेगी-साैभाग्य! न हाे ताे मजबूरी है. हाे जाये ताे साैभाग्य; न हाे ताे कुछ किया नहीं जा सकता, असहाय अवस्था है. हाे जाये ताे धन्यभाग! परमात्मा काे धन्यवाद दिया जा सकता है.