उम्र, परिस्थितियां और साधन सफलता में बाधा नहीं

जीवन के विभिन्न पड़ावों से गुजर रहे समाज निर्माण में योगदान देने वालों की महत्वपूर्ण राय

    04-Jan-2026
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पुणे, 3 दिसंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
जीवन के विभिन्न पड़ावों से गुजरते हुए जब साधारण लोग अपने अनुभव, मेहनत और संवेदनशीलता के बल पर असाधारण कार्य करते हैं, तब वे केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं. कोई योग के माध्यम से स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखा रहा है, कोई सामाजिक अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा रहा है, कोई कला को समाज सेवा से जोड़ रहा है, तो कोई कानून और खेल के क्षेत्र में अनुशासन, जागरूकता और सेवा का संदेश दे रहा है. इन सभी व्यक्तित्वों की कहानियां यह सिद्ध करती हैं कि उम्र, परिस्थितियां या संसाधनों की सीमाएं कभी भी सकारात्मक बदलाव की राह में बाधा नहीं बन सकतीं. इन सभी लोगों ने दै.bआज का आनंद के लिए प्रो.रेणु अग्रवाल ने बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनकी बातचीत के प्रमुख अंशप्रो. रेणु अग्रवाल (मो. 8830670849)
  योग से स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और पहचान
मेरी उम्र 64 वर्ष है और मेरी शादी को 46 वर्ष पूरे हो चुके हैं. विवाह के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाते हुए मैंने छोटे-बड़े कई कार्य किए जैसे दिवाली के लिए घर पर नमकीन-मिठाइयां बनाना और सिलाई का काम करना. बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी शुरू हुईं. इसी दौरान वर्ष 2005 में मैंने भारतीय योग विद्या भवन में प्रवेश लिया और नियमित योगाभ्यास शुरू किया, जिससे मेरी सेहत में उल्लेखनीय सुधार हुआ. इस सकारात्मक अनुभव ने मुझे योग के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया. इसके बाद मैंने विभिन्न योग कोर्स किए और लोगों को योग सिखाना शुरू किया. पिछले कई वर्षों में मैंने अनेक लोगों को तनाव-मुक्त और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा दी है. आज योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि सम्मानजनक आय का साधन भी है. स्कूल, अस्पताल, कॉरपोरेट कार्यालय और जिम में योग प्रशिक्षकों की निरंतर मांग है. कोई भी महिला घरेलू जिम्मेदारियों के साथ योग में करियर बनाकर समाज में पहचान बना सकती है. - सत्यभामा बंसल, वाकड़ेवाड़ी, पुणे
 

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 सामाजिक जागरूकता ही सच्ची समाज सेवा
मेरी उम्र 54 वर्ष है और मैंने फिल्म इंडस्ट्री में प्रोडक्शन डिजाइनर तथा प्रोडक्शन कंट्रोलर के रूप में कार्य किया है. हमारे प्रयासों से सोनी टीवी के कार्यक्रम हमसे बढ़कर कौन में 1800 बच्चों को मंच मिलने का अवसर प्राप्त हुआ. फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ सामाजिक कार्यों के प्रति रुचि के कारण आज मैं एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी सक्रिय हूँ. मेरा मानना है कि आज के समय में सजग, सुशिक्षित और संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ताओं की अत्यंत आवश्यकता है. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और ज्योतिबा फुले जैसे समाज सुधारकों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर मैंने छत्रपति संभाजीनगर में जल आपूर्ति के निजीकरण के विरोध में जनजागृति की और उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की. इस अभियान में अनेक लोगों का सहयोग मिला, जिसके लिए मैं सदैव आभारी रहूंगा. नई पीढ़ी को मेरा संदेश हैसजग नागरिक बनें और समाज के लिए निरंतर कार्य करें. - विजय गोविंदराव शिरसाट, सामाजिक कार्यकर्ता अध्यक्ष जलाधिकार कृति समिति मुंबई
 
 
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कला सकारात्मक सोच विकसित करती है
मेरी उम्र 48 वर्ष है और पुणे के पाषाण, सूस रोड पर मिलिंद मिसाल्स पिकासो आर्ट स्टूडियो का संचालन करता हूं. यहाँ सभी आयु वर्ग के विद्यार्थियों को ड्राइंग, पेंटिंग, अप्लाइड आर्ट, ग्राफिक आर्ट, क्ले आर्ट तथा वारली, गोंड और मधुबनी जैसी लोक कलाएँ सिखाई जाती हैं. यह स्टूडियो केवल कला शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज सेवा का भी माध्यम है. आर्ट एग्जीबिशन में विद्यार्थियों की पेंटिंग्स की बिक्री से प्राप्त राशि का एक हिस्सा सामाजिक संस्थाओं और एनजीओ को दान किया जाता है. हमारी अधिकांश प्रदर्शनियाँ पुणे के बाल गंधर्व में आयोजित होती हैं. 29 जनवरी 2026 को भी एक कला प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है. मेरा मानना है कि कला आत्म-वेिशास, सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता विकसित करती है. सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास से कला को भी एक सम्मानजनक करियर बनाया जा सकता है. - मिलिंद गं. मिसाल, सूस रोड, पाषाण, पुणे
 

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वकील का दायित्व सामाजिक भी होता है
मेरी उम्र 50 वर्ष है और मैं पिछले 20 वर्षों से वकालत कर रहा हूं. मैंने मेडिएटर की ट्रेनिंग भी ली है, इसलिए अब वकील के साथ-साथ मेडिएटर के रूप में भी कार्यरत हूं. मेरे अनुभव में किसी भी पेशे में सफलता के लिए उस क्षेत्र की संपूर्ण जानकारी और समाज-सेवा की भावना आवश्यक है. जो विद्यार्थी वकील बनना चाहते हैं, उन्हें मैं यही सलाह दूँगा कि कठिन परिश्रम, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प से ही सफलता प्राप्त होती है. आज समाज में साइबर क्राइम और ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए नागरिकों का जागरूक और सतर्क रहना अत्यंत आवश्यक है. वकील का दायित्व केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक भी होता है. सही मार्गदर्शन देकर हम समाज को सुरक्षित और न्यायपूर्ण बना सकते हैं. - पठान मो. आबेद अली खान सिल्क मिल्स कॉलोनी छत्रपति संभाजीनगर
 

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खेल ही वास्तव में सच्ची संपत्ति है
मैं एक अंतरराष्ट्रीय ट्रायथलॉन खिलाड़ी और सिविल इंजीनियर हूँ. मैंने एशियन गेम्स 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. आज की पीढ़ी के लिए मेरा स्पष्ट संदेश है. पढ़ाई के साथ-साथ खेल और व्यायाम को भी उतना ही महत्व दें. मोबाइल और तकनीक जरूरी हैं, लेकिन शारीरिक स्वास्थ्य उनसे कहीं अधिक मूल्यवान है. बचपन से ही मैंने खेल को अपनाया और वर्षों की मेहनत के बाद एशियन गेम्स में चयन हुआ. रोजाना 1 से 2 घंटे व्यायाम, साइकिलिंग, दौड़ या पैदल चलना कोई भी गतिविधि शरीर को स्वस्थ रखती है. शरीर ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है. आज स्पोर्ट्स कोटा के माध्यम से अनेक करियर और नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं. खेल में भी उज्ज्वल भविष्य संभव है, बस समर्पण और अनुशासन जरूरी है. -अनिश सचेंद्र शुक्ला, छत्रपति संभाजीनगर
 

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 वकालत : न्याय के माध्यम से समाज सेवा
मेरी उम्र 50 वर्ष है और मैं पिछले 20 वर्षों से वकालात कर रहा हूँ. गंगापुर तहसील के शिलेगांव से जुड़े होने के कारण क्षेत्र की सामाजिक-कानूनी समस्याओं को नजदीक से समझने का अवसर मिला. हमारे जिले में 71 गांवों के लिए केवल एक पुलिस स्टेशन है और लंबे समय तक मैं वहां एकमात्र वकील रहा, जिससे मुझे प्रारंभ से ही अनेक जिम्मेदारियां मिलीं.मैंने हमेशा अपने पक्षकारों के हित को प्राथमिकता दी, इसी कारण कार्य की कभी कमी नहीं रही. वकीली पेशे में आने वाले विद्यार्थियों को मेरा संदेश है कि वे सभी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं की गहन जानकारी प्राप्त करने के बाद ही कानूनी सलाह दें. यह पेशा पीड़ित और गरीब लोगों को न्याय दिलाकर समाज सेवा करने का श्रेष्ठ माध्यम है. - एडवोकेट सुनील किसनराव आमराव, पंचशील नगर

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