पुणे, 7 जनवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) आगामी पुणे मनपा चुनाव की पृष्ठभूमि में शिवसेना द्वारा घोषित ‘शब्द शिवसेना का' विकास एजेंडा केवल ओशासनों तक सीमित न रहकर पुणे की राजनीतिक समीकरणों पर प्रभाव डालता नजर आ रहा है, ऐसी चर्चा राजनीतिक गलियारों में शुरू हो गई है. पुणे परंपरागत रूप से शिक्षित, मध्यमवर्गीय और शहरी मुद्दों के प्रति सजग मतदाताओं का शहर माना जाता है. यातायात जाम, अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, झुग्गी पुनर्वास, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था जैसे मुद्दे हमेशा चुनावों में निर्णायक रहे हैं. इस पृष्ठभूमि में एकनाथ शिंदे द्वारा प्रस्तुत विकास का खाका सीधे शहरी मध्यमवर्ग, महिला मतदाताओं, झुग्गीवासियों और युवा वर्ग को संबोधित करता है, ऐसा राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है. विशेष रूप से पुणे विकास परिषद, एकीकृत यातायात योजना, मेट्रो विस्तार और ऑटोमोबाइल व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा से जुड़ी घोषणाओं को पुणे की भविष्य की शहरी जरूरतों के अनुरूप माना जा रहा है. इसके चलते अब तक विकास के मुद्दे पर बढ़त बनाए हुए विपक्षी दलों के सामने शिवसेना ने सीधी चुनौती खड़ी कर दी है.महिला सशक्तिकरण के तहत दो लाख महिलाओं को लखपति बनाने की घोषणा, महिला बचत समूहों को आर्थिक सहयोग और झुग्गीवासियों को मुफ्त आवास देने के वादे के जरिए महिला और निम्न मध्यमवर्गीय मतदाताओं के बीच शिवसेना की पकड़ मजबूत करने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. इसके साथ ही ‘भयमुक्त पुणे' का नारा देकर कानून व्यवस्था का मुद्दा सामने लाने से शहरी मतदाताओं की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को संबोधित करने की कोशिश भी की गई है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है. सांस्कृतिक दृष्टि से पुणेकरों की भावनाओं से जुड़े ग्लोबल गणेशोत्सव, मराठी संगीत रंगमंच संग्रहालय और लता मंगेशकर स्मृति परियोजना जैसे कदम शहर की सांस्कृतिक पहचान पर केंद्रित माने जा रहे हैं. इससे स्थानीय अस्मिता के मुद्दे को शिवसेना द्वारा प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का प्रयास नजर आता है. कुल मिलाकर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्योग मंत्री उदय सामंत के नेतृत्व में शिवसेना का यह घोषणा पत्र केवल चुनावी वादों का संकलन नहीं, बल्कि पुणे में शिवसेना को शहरी विकास केंद्रित विकल्प के रूप में स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. इसके चलते आगामी मनपा चुनाव में पारंपरिक दलगत समीकरणों के बजाय विकास बनाम प्रशासनिक दक्षता की लड़ाई उभरने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.