विकास के बावजूद पर्याप्त औपचारिक रोजगार पैदा करने में देश विफल
सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स व्याख्यान" में प्रो. अरविंद सुब्रमण्यम ने व्यक्त किए अपने विचार
09-Jan-2026
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लवले, 8 जनवरी (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) दुनिया के कुल श्रम बल (लेबर फोर्स) में भारत की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है, फिर भी वैेिशक कम- कुशल विनिर्माण निर्यात में इसका योगदान केवल 3 से 4 प्रतिशत है. इस विरोधाभास को संक्षेप में बताते हुए प्रो. अरविंद सुब्रमण्यम ने टिप्पणी की कि भारत ने विकास तो उत्पन्न किया, लेकिन वह पर्याप्त औपचारिक नौकरियां पैदा करने में विफल रहा. वे ‘फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स' व्याख्यान श्रृंखला में बोल रहे थे. सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के लवले कैंपस में बुधवार (7 जनवरी) को फेस्टिवल ऑफ थिंकर्स व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में ‘ए सिक्स्थ ऑफ ह्यूमैनिटी: इंडिपेंडेंट इंडियाज डेवलपमेंट ओडिसी' के लेखक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. देवेश कपूर और प्रो.अरविंद सुब्रमण्यम शामिल हुए. उन्होंने भारत के अपरंपरागत विकास पथ के बारे में बात करते हुए कहा, आमतौर पर वैेिशक विकास का पैटर्न पहले कृषि, फिर विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और उसके बाद सेवा क्षेत्र होता है. भारत ने विनिर्माण के चरण को छोड़ दिया और सीधे कृषि से सेवा क्षेत्र की ओर बढ़ गया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत असामान्य है. लगभग 3,000 आधिकारिक सरकारी रिपोर्टों के विश्लेषण के आधार पर, वक्ताओं ने स्वतंत्रता के बाद से भारत के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक विकास पर चर्चा की और भारत के अनुभव को ऐतिहासिक व वैेिशक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया. भारत के शुरुआती राजनीतिक विकल्पों पर बात करते हुए प्रो. देवेश कपूर ने कहा कि, कोई देश कितना अच्छा प्रदर्शन करता है, इसका अंदाजा केवल उसके अपने अतीत से नहीं लगाया जा सकता. इसका मूल्यांकन इस आधार पर भी किया जाना चाहिए कि बाकी दुनिया किस तरह बदल रही है. भारत के लोकतांत्रिक प्रयोग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने आगे कहा, भारत इस मामले में पूरी तरह से अलग है. व्याख्यान का समापन छात्रों और संकाय सदस्यों के साथ शासन (गवर्नेंस), श्रम बाजार, सार्वजनिक क्षेत्र की दक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में साक्ष्य- आधारित नीति निर्माण की भूमिका पर एक संवादात्मक चर्चा के साथ हुआ. प्रो. डॉ. एस. बी. मुजुमदार (संस्थापक और अध्यक्ष, सिम्बायोसिस; चांसलर, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. डॉ. विद्या येरवडेकर (प्रो-चांसलर, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) ने स्वागत भाषण दिया. डॉ. आर. रमन (कुलपति, सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) ने आभार प्रदर्शन किया. प्रो. ज्योति चंदीरामनी (डीन, मानविकी और सामाजिक विज्ञान संकाय; निदेशक, सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स) ने कार्यक्रम का संचालन किया.
राष्ट्र-निर्माण का अनुभव वैेिशक स्तर पर अद्वितीय प्रो. देवेश कपूर ने कहा, आय और साक्षरता के अत्यंत निम्न स्तर पर भी इसने मसार्वभौमिक वयस्क मताधिकारफ को अपनाया. विकास के इतने शुरुआती चरण में किसी अन्य देश ने लोकतंत्र का प्रयास नहीं किया था. भारत का राष्ट्र-निर्माण का अनुभव वैेिशक स्तर पर अद्वितीय है, वेिश इतिहास में राज्य और राष्ट्र निर्माण में लगभग हमेशा व्यापक हिंसा शामिल रही है. तुलनात्मक रूप से, भारत ने सामूहिक हिंसा के बेहद कम स्तर के साथ राजनीतिक व्यवस्था हासिल की.