पुणे, 30 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भारती विद्यापीठ अभिमत वेिशविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज और भारत सरकार की मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) के सहयोग से रक्षा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक का उपयोग करने वाली परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया. यह परियोजना फ्लो एपीआईएस प्रा. लि. और भारती विद्यापीठ अभिमत वेिशविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के बीच हुए सहयोग समझौते के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में स्थापित फ्लो एआई इनोवेशन एंड रिसर्च लेबोरेटरी के माध्यम से संचालित की गई. इस परियोजना में 2 मेगावाट क्षमता वाले ऑफ-ग्रिड सोलर माइक्रोग्रिड का अध्ययन किया गया. इस परियोजना के समीक्षा कार्यक्रम में पुणे के चीफ इंजीनियर एवं जॉइंट डायरेक्टर जनरल (पर्सोनेल एंड ट्रेनिंग) तथा असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल (डिजाइन एंड कंसल्टेंसी) उमेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. उनके साथ आईडीएसई अधिकारी ब्रजेन्द्र कुमार, डायरेक्टर (डिजाइन) तथा मितेश बरकले, डायरेक्टर (डिजाइन) उपस्थित थे. प्राचार्य डॉ. राजेश प्रसाद, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की प्रमुख डॉ. सोनाली माली तथा परियोजना के क्रियान्वयन में मार्गदर्शन करने वाले डॉ. मिलिंद गायकवाड़ भी इस अवसर पर उपस्थित थे. ऋषिकेश गिरपुंजे ने शोध से संबंधित तुलनात्मक अध्ययन और परियोजना की भविष्य की संभावनाओं का प्रस्तुतीकरण किया. कार्यक्रम का समन्वय सोमेश सिंह ने किया. डॉ. गजानन भोले ने आभार व्यक्त किया. उमेश कुमार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में आलोचनात्मक और तार्किक सोच के महत्व को रेखांकित किया. डॉ.राजेश प्रसाद ने कहा कि फेयर लैब के माध्यम से शैक्षणिक क्षेत्र की क्षमताओं को सरकारी और औद्योगिक समस्याओं से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है.