जिला परिषद स्कूलों की कक्षाओं से खुल रही भाषाओं की खिड़की

ग्रामीण विद्यार्थियों को वैेिशक स्तर से जोड़ने की पहल; 219 शिक्षक विदेशी भाषाओं का ले रहे प्रशिक्षण

    01-Oct-2026
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vd
पुणे, 30 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

पुणे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की जिला परिषद स्कूलों की कक्षाओं में अब विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं और विभिन्न देशों की संस्कृतियों से परिचित कराने की पहल आकार ले रही है. कभी असंभव लगने वाला दृश्य अब इन स्कूलों में दिखाई देने लगा है, जहां मराठी माध्यम के विद्यार्थियों के सामने शिक्षक जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश, रूसी और जापानी भाषा के शब्दों से परिचय करा रहे ह्‌ैं‍. डिजिटल माध्यमों के विस्तार के साथ दुनिया के दूर-दराज के देश अब विद्यार्थियों के लिए पहले की तुलना में अधिक करीब आए हैं. शिक्षा, तकनीक, उद्योग, रोजगार और संवाद के नए अवसरों में भाषा का महत्व बढ़ रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए पुणे जिला परिषद ने ग्रामीण विद्यार्थियों को वैेिशक स्तर से जोड़ने के लिए शिक्षकों को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देने की पहल की है. पुणे जिला परिषद और सावित्रीबाई फुले पुणे वेिशविद्यालय के विदेशी भाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में यह पहल संचालित की जा रही है. यह इस उपक्रम का दूसरा वर्ष है. इस वर्ष 219 शिक्षक पांच भाषाओं का प्रशिक्षण ले रहे ह्‌ैं‍. इनमें जर्मन के 126, फ्रेंच के 22, स्पेनिश के 22, रूसी के 23 और जापानी के 25 शिक्षक शामिल हैं. शिक्षक सीखेंगे, तो विद्यार्थी भी सीखेंगे इस पहल की खासियत यह है कि शिक्षक के माध्यम से विदेशी भाषा और संस्कृति की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचेगी. कक्षा में शिक्षक नए शब्दों, अभिवादन, किसी देश की संस्कृति, जीवनशैली और वहां से जुड़े संदर्भों से विद्यार्थियों को परिचित करा सकेंगे.पहले वर्ष 102 शिक्षकों ने प्रशिक्षण लिया था. इन शिक्षकों ने औसतन 50 विद्यार्थियों तक विदेशी भाषा और संबंधित भाषास ंस्कृति की जानकारी पहुंचाई्‌‍. इससे पांच हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिला. शहरों के विद्यार्थियों को विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों से परिचित होने के कई माध्यम उपलब्ध होते ह्‌ैं‍. ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए ऐसी संभावनाएं अपेक्षाकृत सीमित हो सकती हैं. इस अंतर को कम करने का प्रयास इस पहल के माध्यम से किया जा रहा है. जापान कहां है? जर्मनी में कौन-सी भाषा बोली जाती है? फ्रांस की संस्कृति कैसी है? स्पेनिश भाषा का विस्तार कितना बड़ा है? रूसी भाषा कैसी सुनाई देती है? ऐसे सवाल विद्यार्थियों में पैदा होना ही इस पहल की शुरुआत है. यह जिज्ञासा आगे चलकर पढ़ने की आदत, संवाद कौशल और विभिन्न संस्कृतियों को समझने की दृष्टि विकसित कर सकती है. जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गजानन पाटील ने कहा,विदेशी भाषाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और वैेिशक संदर्भों से परिचित कराया जा सकता है. यह पहल शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के साथ ही इसका लाभ हजारों विद्यार्थियों तक पहुंचाने वाली है. आज 219 शिक्षक नई भाषाओं का अध्ययन कर रहे ह्‌ैं‍. आने वाले समय में इनकी जानकारी कक्षाओं तक पहुंचेगी और विद्यार्थियों के मन में नए सवाल तथा जिज्ञासा पैदा होगी. यही जिज्ञासा ज्ञान के नए द्वार खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बन सकती है.  
 
संस्कृति की समझ पर जोर

 विदेशी भाषा सीखना केवल कुछ शब्द याद करने या नई लिपि पहचानने तक सीमित नहीं है. भाषा के साथ उस देश की संस्कृति, परंपरा, जीवनशैली और दुनिया को देखने का नजरिया भी समझने का अवसर मिलता है. प्रशिक्षण में सुनने, पढ़ने, लिखने और बोलने के चारों कौशलों पर जोर दिया जा रहा है. शिक्षकों के लिए 180 घंटे का व्यवस्थित भाषा पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है, ताकि वे भाषा का व्यावहारिक उपयोग कर सकें.