पिंपरी, 30 सितंबर (आ.प्र.)
शहर में बढ़ते अवैध निर्माणाें पर राेक लगाने और इस मामले में हाे रहे कथित भ्रष्टाचार काे राेकने मनपा के आयुक्त डाॅ. विजय सूर्यवंशी ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है. अवैध निर्माणाें पर नज़र रखने वाले बीट निरीक्षकाें का अब हर तीन महीने में दूसरे इलाके में तबादला किया जाएगा. प्रशासन की ओर से बताया गया है कि यदि काेई निरीक्षक किसी इलाके में लंबे समय तक कार्य करता है, ताे स्थानीय बिल्डराें के साथ उसके आर्थिक हितसंबंध बनने की संभावना रहती है, इसी काे ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है.
शहर के विभिन्न हिस्साें में जब नए अवैध निर्माण शुरू हाेते हैं, ताे शुरुआती चरण में ही उनकी जानकारी प्राप्त करना, वरिष्ठ अधिकारियाें काे सूचित करना और आवश्यक कार्रवाई के लिए फाॅलाे-अप करना बीट निरीक्षक की प्रमुख जिम्मेदारी हाेती है, इसलिए अवैध निर्माणाें पर राेक लगाने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. हालांकि, कुछ निरीक्षकाें के एक ही इलाके में लंबे समय तक रहने से स्थानीय बिल्डराें, नागरिकाें या संदिग्ध तत्वाें के साथ उनके आर्थिक संबंध स्थापित हाेने की शिकायतें मिल रही थीं. आराेप है कि इसी वजह से अवैध निर्माणाें की जान-बूझकर उपेक्षा की जाती थी.
परिणामस्वरूप, शहर में अवैध निर्माणाें काे बढ़ावा मिलने की तस्वीर दिख रही थी. इस पृष्ठभूमि में, आयुक्त ने बीट निरीक्षकाें के कार्यकाल की सीमा तय करने का निर्देश दिया है. हर तीन महीने में तबादला हाेने से किसी एक इलाके में लंबे समय तक संपर्क नहीं रहेगा और स्थानीय स्तर पर बनने वाले सांठ-गांठ या हितसंबंधाें पर राेक लगेगी, ऐसी प्रशासन की काेशिश है.
इस बीच, केवल तबादले करने से अवैध निर्माण की समस्या हल नहीं हाेगी. निरीक्षकाें से मिलने वाली रिपाेर्टाें की वरिष्ठ अधिकारियाें द्वारा नियमित निगरानी, शिकायताें का त्वरित संज्ञान लेना और अवैध निर्माण पाए जाने पर समय पर कार्रवाई करना आवश्यक है.
मनपा द्वारा भ्रष्टाचार की कड़ी ताेड़ने का प्रयास मनपा आयुक्त के नए निर्देशाें के अनुसार, अब काेई भी बीट निरीक्षक एक ही प्रभाग या क्षेत्र में तीन महीने से अधिक समय तक कार्यरत नहीं रह सकेगा. तीन महीने पूरे हाेते ही उनका तुरंत दूसरे प्रभाग में तबादला कर दिया जाएगा. इस नीति से बीट निरीक्षकाें काे स्थानीय स्तर पर अपने संबंध मजबूत करने का समय नहीं मिलेगा. साथ ही, बिल्डराें या भू-माफियाओं के साथ आर्थिक सांठ- गांठ बैठाने से पहले ही उनका तबादला हाे जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार की यह कड़ी जड़ से टूट जाएगी, ऐसा विश्वास प्रशासन ने जताया है.