यदि समकालीन मनुष्य जीवन में आ जाये, सारी टेक्नाेलाॅजी, सारी प्राेद्याेगिकी उसकी सेवक हाे जायेगी. किसी मनुष्य काे िफर नाैकर की भांति काम करने की आवश्यकता नहीं हाेगी, टेक्नाेलाॅजी वह कर सकती है. मनुष्य के काम के घंटे करीब-करीब समाप्त हाे सकते हैं. यंत्रवत काम, जितना मनुष्य कभी कर सके, उससे अधिक क्षमता से कर सकते हैं. और यदि सभी काम टेक्नाेलाॅजी और यंत्राें द्वारा संभव हाे जाये, मनुष्य अपनी चेतना काे विकसित करने के लिए स्वतंत्र हाे सकेगा.
उसके पास पर्याप्त समय हाेगा ध्यान के लिए, इस जीवन का अतिक्रमण करने के लिए, भावातीत, अमरत्व में प्रवेश करने के लिए. और यंत्र चमत्कार कर सकते हैं. तुम्हें दिल का दाैरा पड़ता है- कितने लाेग दिल के दाैरे से मरते हैं- और अब प्रयाेगात्मक रूप से तुम्हारें दिल काे प्लास्टिक के दिल में बदलना संभव है.
लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि तुम्हारा प्रेम भी प्लास्टिक जैसा हाे जायेगा, बल्कि तुम्हारा दिल इतना मजबूत हाे जायेगा कि इसके ेल हाे जाने की काेई संभावना ही न रहेगी.मनुष्य का शरीर हर संभव तरीके से सुधारा जा सकता है. प्लास्टिक सर्जरी लाेगाें काे इतना सुंदर बना सकती है कि जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन राजनैतिक मूढ़ बस इसी बात में उत्सुक हैं कि विनाश कैसे किया जाये.