बिबवेवाड़ी, 9 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) ‘दादावाला करंडक’ भारतीय लोक परंपरा की समृद्ध और विविध विरासत का एक रंगारंग दर्शन कराने वाली पहल है. इन परंपराओं को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है. यह बात ‘दि पूना गुजराती केलवणी मंडल’ के अध्यक्ष डॉ. राजेश शाह ने कही. वे ‘दादावाला करंडक’ के पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे. ‘दि पूना गुजराती केलवणी मंडल’ की ओर से ए.एस.डी.बी. दादावाला जूनियर कॉलेज द्वारा ‘दादावाला करंडक’ अंतरस्कू ली एवं अंतर-महाविद्यालयीन लोकनृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था. यह प्रतियोगिता 7 और 8 अक्टूबर को लोकशाहीर अन्नाभाऊ साठे सभागार (बिबवेवाड़ी) में उत्साहपूर्ण माहौल में संपन्न हुई. ‘दादावाला करंडक’ प्रतियोगिता का यह लगातार चौथा वर्ष था. इस प्रतियोगिता में 18 स्कूलों और 14 कनिष्ठ महाविद्यालयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. भाग लेने वाले विद्यार्थियों ने भारत के विभिन्न राज्यों, क्षेत्रों, लोक-परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाले लोकनृत्य प्रस्तुत करके सभागार में उत्साह और रंग जमा दिया. पुरस्कार वितरण समारोह संस्था के अध्यक्ष डॉ. राजेश शाह, उपाध्यक्ष जनक शाह, सचिव हेमंत मणियार, सहसचिव संदीप शाह, दिलीप जगड, विनोद देडिया, कोषाध्यक्ष महेश धरोड, सहकोषाध्यक्ष प्रमोद शाह तथा मंडल के ट्रस्टी वल्लभभाई पटेल के हाथों संपन्न हुआ. इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या अनुजा सेलोट, उपप्राचार्य उन्नति पाढ तथा पर्यवेक्षक मिलिंद गुंजाल उपस्थित थे. स्कूली स्पर्धा का मूल्यांकन प्रसिद्ध कलाकार निधि मेहता और राहुल साठे ने किया. जयराज ग्रुप की ओर से सभी प्रतिभागी 32 स्कूलों को 5-5 हजार रुपये का विशेष पुरस्कार दिया गया. कार्यक्रम का संचालन क्षमा गद्रे और दीप्ति सत्यनारायण ने किया. अर्चना काले और अमृत शेजवलकर ने प्रतियोगिता को सफल बनाने में विशेष योगदान दिया. दादावाला करंडक के विजेता शालेय स्तर पर प्रथम स्थान पर नाणे माध्यमिक विद्यालय, मावल, द्वितीय हुजूरपागा सेकेंडरी स्कूल, कात्रज और तृतीय स्थान पर रेणुका स्वरूप मेमोरियल गर्ल्स हाईस्कूल रहे. जबकि, कनिष्ठ महाविद्यालयीन स्तर पर प्रथम स्थान पर फर्ग्युसन कॉलेज, द्वितीय हुजूरपागा, लक्ष्मी रोड और तृतीय स्थान पर हुजूरपागा, कात्रज रहे.