नई दिल्ली, 9 अ्नटूबर (वि.प्र.)
सुप्रीम काेर्ट के अपराधियाें काे क्षमा करने की प्रवृत्ति पर अंकुश जरुरी है. हरियाणा में एक परिवार के 8 सदस्याें की हत्या मामले में दायर माफी याचिका पर जजाें की महत्वपूर्ण टिपण्णी.माफी की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा- मृत्युदंड कम करने में काेर्ट की माफी के चलते अपराधियाें काे प्राेत्साहन मिल रहा है. जघन्य अपराधियाें काे ताे सजा मिलनी ही चाहिए. सुप्रीम काेर्ट ने एक माफी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए टिप्पणी की कि मृत्युदंड काे कम करने में न्यायपालिका की क्षमाशील प्रवृत्ति के कारण देश में अपराध में वृद्धि हुई है और जघन्य अपराधियाें पर दया दिखाने की इस प्रथा काे कहीं न कहीं समाप्त हाेना हाेगा.
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ हिसार जिले में 2001 में हरियाणा के एक पूर्व विधायक के परिवार के 8 सदस्याें की जघन्य हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दंपति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उनकी समय से पहले रिहाई की मांग की गई थी.
मामले के विवरण के अनुसार, यह घटना 23 अगस्त, 2001 काे घटी, जब साेनिया (तब 19 वर्ष की) और उसके पति संजीव कुमार ने साेते समय उसके पिता और पूर्व विधायक रेलू राम पुनिया (उम्र-50 वर्ष), उसकी मां (उम्र-41 वर्ष), उसके दाे भाई-बहनाें (16 वर्षीय बहन और 23 वर्षीय भाई), भाभी (उम्र- 20 वर्ष) और उसके भाई के तीन बच्चाें (4 वर्ष, 2 वर्ष और 45 दिन के) की हत्या कर दी. परिवार साेनिया का जन्मदिन मनाने के लिए इकट्ठा हुआ था.