गाजे-बाजे के साथ शुरू किए स्मार्ट सिटी के कई प्रोजेक्ट अधूरे

फिर भी दो सलाहकार कंपनियों पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे : पैसों की हो रही बर्बादी

    10-Oct-2026
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PimpriChinchwad
पिंपरी, 9 अ्नटूबर (आ.प्र.)
पिंपरी-चिंचवड़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के खर्चाें पर करीब से नज़र डालने से जनता के पैसाें के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठे हैं. कई बड़ी परियाेजनाएं अधूरी हाेने और सार्वजनिक सेवा में पूरी तरह न आ पाने के बावजूद, दाे कंसल्टेंसी फर्माें काे 58.30 कराेड़ से अधिक का भुगतान किया गया है. प्राेजेक्ट्स पूरे कर उन्हें मनपा काे साैंपने और कंपनी काे बंद करने के बजाय, पिछले कुछ वर्षाें में कंपनी अपने सलाहकाराें का कार्यकाल लगातार बढ़ाती रही है. अर्नस्ट एंड यंग एलएलपी काे 27.86 कराेड़ और केपीएमजी एड्वायजरी सर्विसेज प्राइवेट कंपनी लिमिटेड कंपनी काे 30.43 कराेड़ का भुगतान किया गया है.
 
इन भुगतानाें ने नागरिकाें काे यह पूछने पर मजबूर कर दिया है कि जब वे बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब बहुराष्ट्रीय कंसल्टेंसी फर्माें काे इतनी भारी रकम क्याें दी जा रही है.
 
देरी, लेकिन काेई कार्रवाई नहीं स्मार्ट सिटी प्राेजेक्ट काे शहर काे एक तकनीकी रूप से उन्नत शहर में बदलने के ब्लूप्रिंट के रूप में पेश किया गया था, जिसके अंतर्गत सैकड़ाें कराेड़ रुपये की परियाेजनाओं की घाेषणा की गई थी. हालांकि, कई प्रमुख प्राेजेक्ट्स अधूरे रह गए हैं या वादा किए गए परिणाम देने में विफल रहे हैं.
 
इसके बावजूद, नियाेजन और सलाहकार सेवाओं के लिए नियुक्त कंसल्टेंसी फर्माें काे भुगतान और कार्यकाल विस्तार मिलता रहा है. विलंबित परियाेजनाओं से जुड़ी एजेंसियाें के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, स्मार्ट सिटी प्रशासन ने उनके कार्यकाल काे बढ़ा दिया है, जिससे कंपनी के कामकाज पर सवाल उठ रहे हैं.
 
यदि परियाेजनाएं 7 से 8 वर्षाें तक खिंचती रही हैं, ताे नागरिक पूछ रहे हैं कि सलाहकाराें ने इस दाैरान वास्तव में क्या काम किया है? वाई-फाई, वाॅटर मीटर, ट्रैफिक सिग्नल और सीसीटीवी नेटवर्क में देरी से नागरिकाें पर असर पड़ रहा है, जबकि सलाहकाराें पर खर्च जारी है.
 
स्मार्ट सिटी कंपनी के अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हाे रहे हैं. यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह एक ऐसा वित्तीय बाेझ बन गई है जिसे जिंदा रखा जा रहा है, भले ही केंद्र सरकार पहले ही राष्ट्रीय स्मार्ट सिटी मिशन काे बंद कर चुकी है. जब सूत्राें द्वारा संपर्क किया गया, ताे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और निदेशक मंडल के सदस्याें ने टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया.नागरिकाें ने प्रतिक्रिया दी कि इस पैसे का बेहतर उपयाेग क्या आंतरिक सड़काें, खेल के मैदानाें और स्वास्थ्य केंद्राें जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर नहीं किया जा सकता था.
 
बंद करने का आदेश, लेकिन बंदी नहीं तत्कालीन नगर आयुक्त श्रवण हर्डिकर ने आदेश दिया था कि कंपनी काे 31 मार्च 2026 तक बंद कर दिया जाए और सभी प्राेजेक्ट्स संबंधित नागरिक विभागाें काे हस्तांतरित कर दिए जाएं. इस प्रक्रिया के लिए एक अलग समिति बनाई गई थी और चल रहे, अधूरे तथा पूरे हाे चुके प्राेजेक्ट्स की सूची वाली एक मूल्यांकन रिपाेर्ट तैयार की गई थी. राज्य नगर विकास विभाग ने भी पूरे महाराष्ट्र मनपा काे निर्देश दिया था कि वे अपनी स्मार्ट सिटी कंपनियाें काे भंग करें और उनके अधिकार नगर आयुक्त में निहित करें. हालांकि, पिंपरी-चिंचवड़ कंपनी का काम जारी है. काॅन्ट्रै्नट अधिकारियाें और कर्मचारियाें काे भी तुरंत उनके कर्तव्याें से कार्यमुक्त नहीं किया गया.
 
केंद्र ने एक साल पहले मिशन बंद कर दिया केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2025 काे स्मार्ट सिटी मिशन बंद कर दिया, जिसके बाद केंद्रीय वित्त पाेषण बंद हाे गया. तब से, स्मार्ट सिटी खर्च मनपा के अपने फंड से वहन किया जा रहा है. इस प्राेजेक्ट में अब तक 1,378.56 कराेड़ की खपत हाे चुकी है, फिर भी कई काम अधूरे पड़े हैं. लंबित प्राेजेक्ट्स काे पूरा करने के लिए बार-बार विस्तार दिया गया है. कुछ प्राेजेक्ट्स और सिस्टम पुराने हाे गए हैं, जबकि कई से अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हुआ है.