पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण सूखे मेवों की कीमतें बढ़ीं

तनाव, महंगे माल भाड़े व फसलों के नुकसान का पड़ रहा गंभीर असर

    11-Oct-2026
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गुलटेकड़ी, 10 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)


ऐन त्योहार के मौसम में पश्चिम एशिया में युद्ध संकट और अन्य भू-राजनीतिक तनावों के कारण सूखे मेवे की कीमतें बढ़ गई हैं. विदेशी व्यापार में बाधा आने से बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं और आपूर्ति की किल्लत देखी जा रही है. व्यापारी बता रहे हैं कि इस वर्ष ग्राहकों को सूखे मेवों के लिए अधिक कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए. व्यापारियों का कहना है कि इस वर्ष दीपावली के त्योहार में बिक्री में गिरावट आएगी, क्योंकि वैेिशक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के कारण सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) के दाम बढ़ गए हैं. पश्चिम एशिया में युद्ध कारण उत्पन्न हुई परिवहन संबंधी समस्याओं, कंटेनर मालभाड़े की ऊंची दरों और प्रमुख उत्पादक देशों में फसलों के नुकसान के कारण, कई प्रकार के मेवों की रिटेल कीमतों में पिछले साल के मुकाबले 15 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. विश्लेषक बताते हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर बिक्री पर पड़ सकता है. व्यापारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंची कीमतों और फसलों की कम पैदावार के कारण बिक्री में 10 से 15 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है. पिस्ता सबसे ज्यादा प्रभावित सूखे मेवों में से एक है, जिसकी कीमतों में 30 से 40% तक का उछाल आया है. इसकी मुख्य वजह ईरान से आपूर्ति में रुकावट और कंटेनर मालभाड़े में हुई भारी बढ़ोतरी है. अमेरिका में उत्पादन कम होने की वजह से बादाम के दामों में 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. अमेरिका में फसलों की पैदावार में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट के कारण इसका असर और भी बढ़ गया है. इसके अलावा, मुद्रा का मूल्य घटने (करेंसी में गिरावट) और लॉजिस्टिक्स (परिवहन व आपूर्ति) की लागत बढ़ने के कारण कद्दू के बीज, अखरोट और खजूर जैसी अन्य वस्तुओं की कीमतों में भी 5 से 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. किशमिश और काजू हालांकि, एक अपवाद बने हुए हैं, जिनकी कीमतें कम बढ़ीं हैं. वहीं अच्छी फसल के कारण अंजीर के भाव कम हुए है.  
 
माल की किल्लत और लागत भी बढ़ी

 आने वाले दीपावली के त्योहार में ड्राईफ्रूट और मसाले महंगे होने वाले हैं. अभी जो दाम बढ़े हुए हैं शायद और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. विदेशों से आने वाले सूखे मेवे पहले ‌‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज‌’ (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) के रास्ते आते थे. हालांकि, युद्ध के कारण वह मार्ग बंद हो गया है. जो माल पहले 4 से 5 दिनों में भारत पहुंच जाता था, उसे आने में अब लगभग 40 से 50 दिन लग रहे हैं. जाहिर है, इससे परिवहन लागत बढ़ गई है. इसके अलावा, समय बढ़ने का सीधा असर सूखे मेवों की कीमतों पर पड़ा है. कुछ सामानों की किल्लत हो रही है और यह डर भी है कि एन दीपावली के मौके पर कुछ सामान कम न पड़ जाए. भारत में भी बारिश कम होने के कारण घरेलू मसालों के दाम बढ़ गए हैं. इस वजह से भी कीमतें और बढ़ने की संभावना है. - नवीन गोयल, मे. नवीन पेढी, मार्केट यार्ड  
 
 
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