करोड़ों के घपले में 9 जगहों पर छापे

ईडी द्वारा बंगाल और ओडिशा में गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े स्थानों पर कार्रवाई

    12-Oct-2026
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ED 
काेलकाता, 11 अ्नटूबर (वि.प्र.)
ईडी द्वारा कराेड़ाें की वित्तीय गड़बड़ी में 9 ठिकानाें पर छापेमारी की गयी.बंगाल और ओडिशा में च/ड गुप्ता पाॅवर इंफ्रास्ट्र्नचर से जुड़े स्थानाें पर कार्रवाई की गयी. इस बीच कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिवाइस तथा रिकाॅर्ड जब्त किए गये.139 बैंक एकाउंट, कई म्यूचुअल फंड और शेयर फ्रिज किए गये.
 
कंपनी केबल, कंड्नटर, तार और उससे जुड़े प्राेड्नट का निर्माण करती है. ईडी के काेलकाता ज़ाेनल ऑफिसखख ने पीएमएल 2002 के तहत 5 अक्टूबर काे पश्चिम बंगाल और ओडिशा में च/ड गुप्ता पाॅवर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (जीपीआईएल), उससे जुड़ी कंपनियाें और उसके मैनेजमेंट से जुड़े लाेगाें के 9 ठिकानाें पर तलाशी अभियान चलाया.
 
यह कार्रवाई जीपीआईएल द्वारा किए गए बैंक फ्राॅड की जांच के सिलसिले में की गई. तलाशी के दाैरान पीएमएल, 2002 के प्रावधानाें के तहत कई आपत्तिजनक दस्तावेज़/डिवाइस/रिकाॅर्ड मिले और ज़ब्त किए गए. पीएमएल 2002 के प्रावधानाें के तहत जीपीआईएल से जुड़े कुल 139 बैंक अकाउंट और जीपीआईएल व उससे जुड़े व्यक्तियाें के नाम पर माैजूद कई म्यूचुअल फंड और शेयर फ्रीज कर दिए गए हैं.
 
इसके अलावा 3 महंगी कारें (2 मर्सिडीज़ और 1 बीएमडबल्यू) भी फ्रीज की गई हैं. ज़ब्त की गई चीज़ाें और वित्तीय लेन-देन की अभी जांच चल रही है. ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी.
 
जीपीआईएल पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड कंपनी है और इसका काॅर्पाेरेट ऑफिस भुवनेश्वर, ओडिशा में है और देश भर में इसके मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जाे केबल, कंडक्टर, तार और उससे जुड़े उत्पादाें के निर्माण और सप्लाई का काम करते हैं. कंपनी ने बैंकाें के एक कंसाेर्टियम से बड़ी मात्रा में फंड-बेस्ड और नाॅन-फंड-बेस्ड वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं ली थीं.
 
जीपीआईएल द्वारा बताई गई प्राप्तियाें में लगभग 115.15 कराेड़ की बड़ी विसंगति भी देखी गई, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी ने अपनी चालू संपत्तियाें काे बढ़ाचढ़ाकर दिखाया और नतीजतन उधार लेने की सीमा बढ़ाई. फाेरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि फिक्स्ड एसेट्स के बताए गए मूल्य में काफी वृद्धि हुई है. यह लगभग 211.36 कराेड़ से बढ़कर 493.39 कराेड़ हाे गया है. इसमें लगभग 298.98 कराेड़ का पुनर्मूल्यांकन शामिल है, जिसके लिए काेई सहायक मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन रिपाेर्ट माैजूद नहीं थी.
 
जीपीआईएल ने कथित ताैर पर वित्त वर्ष 2021-22 की अपनी बैलेंस शीट में लगभग 80 कराेड़ की मपरचेज-बिल डिस्काउंटिंग सुविधाफ का खुलासा नहीं किया. फाेरेंसिक ऑडिट में ऐसे लेनदेन की भी पहचान की गई, जिनसे जुड़े संगठनाें काे फंड डायवर्ट किए जाने की संभावना का संकेत मिलता है.