आज भी सुलझ नहीं पाया 'सोमरस' का राज

    12-Oct-2026
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Sci
साेम दाे अर्थ रखता है. एक ताे साेम का अर्थ हैः चन्द्रमा. हिन्दुओं का जाे रस-विज्ञान है, उसमें औषधियाें काे जाे पुष्टि मिलती है, वह चन्द्रमा से मिलती है.
 
सूर्य के बिना औषधियां बड़ी नहीं हाेंगी; वनस्पतियां बड़ी नहीं हाेगी; सूरज उन्हें प्राण देता है. लेकिन जाे रस है, जाे जीवनदायी तत्व है-वह उन्हें चांद से मिलता है; वह चांद के द्वारा मिलता है.
 
यह बात काल्पनिक समझी जाती थी आज तक- कि आयुर्वेद और हिंदुओं की यह जाे रस -विद्या है, यह काव्य है, प्रतिक है. लेकिन इधर पचास वर्षाे में जाे खाेजबीन हुई है, उससे सिद्ध हाे रहा है कि चांद निश्चित ही प्राण देने वाला है.
 
और सूरज जाे कुछ भी देता है, उसमें एक उत्तेजना है, उसमें एक शांति है. इसलिए जितनी शांत औषधियां हैं, उन सब में चांद छिपा है. और जाे सर्वाधिक शांतिदायी औषधि थी, इसी कारण उसे हम साेम-रस कहते थे. पश्चिम में वैज्ञानिक बड़ी खाेज में लगे है. कि वेदाें में जिसकाे साेम-रस कहा है, वह ्नया है? पच्चीसाें प्रस्ताव किये गए हैं, पच्चीसाें दावे किये गए हैं कि यह वनस्पति साेम-रस हाेनी चाहिए. कुछ लक्षण मिलते है, लेकिन पूरे लक्षण किसी वनस्पति से नहीं मिलते. संभावना इस बात की है कि वह वनस्पति पृथ्वी से खाे गई. या हिंदुओं ने उसे विलुप्त कर दिया.
 
काफी काम इस समय विज्ञान में चलता है. बड़ी शाेध की जाती है- साेम की खाेज के लिए. क्योंकि पश्चिम में इधर तीस वर्षाे में वनस्पति के द्वारा, औषधि के द्वारा, रसायन के द्वारा समाधि कैसे प्राप्त की जाय-इस संबंध में बड़ा आंदाेलन है. ताे एल.एस.डी., मारीजुआना, मेस्कलीनइन सब की बड़ी पकड़ है. और सारी गव्हर्नमेन्टस डर गई हैं, सारी दुनिया में रूकावट लगा दी गई है कि काेई भी इन चीजाें काे न ले.
 
यह बड़े मजे की बात है कि शराब सबसे ज्यादा खतरनाक हैं; लेकिन शराब सब जगह प्रचलित है! और ये औषधियां शराब जैसी खतरनाक नहीं हैं. लेकिन इस पर भारी राेक है. और डर इस बात का है कि ये औषधियां व्य्नित में ऐसे क्रांतिकारी फर्क ले आती हैं कि आज का जाे समाज है, वह उस व्य्नित का उपयाेग नहीं कर सकेगा. जैसे अगर युवक एल.एस.डी., मारीजुआना, और इस तरी की खाेजाें का उपयाेग करने लगे, ताे उनकाे युद्ध पर नहीं भेजा जा सकता. वे इतने शांत हाे जाएंगे कि उनकाे युद्ध पर नहीं भेजा जा सकता. उनसे दंगे, उपद्रव नहीं करवाये जा सकते. उन्हें रस ही नहीं रह जाएगा लड़ने का.
 
एक बहुत बड़े विचारक आल्डुअस ह्नसले ने घाेषणा की थी कि इस सदी के पूरे हाेते-हाेते हम साेम का पता लगा लेंगे. क्योंकि साेम इन्हीं से मिलती-जुलती काेई चीज हाेनी चाहिए. इनसे बहुत श्रेष्ठ- लेकिन इनसे मिलती-जुलती. क्योंकि वेद में जाे वर्णन है साेम का कि ऋषि साेम काे पी लेते हैं.