कात्रज प्राणी उद्यान में दिखाई देंगे चीते

अफ्रीका के चिड़ियाघरों से लाए जाएंगे दो जोड़े, विशेष बाड़े के निर्माण की प्रक्रिया शुरू

    13-Oct-2026
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कात्रज, 12 अक्टूबर (शैलेश काले द्वारा)
कभी भारत में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले चीते 1952 में देश से विलुप्त घाेषित कर दिए गए थे. अब इनके संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासाें काे सफलता मिल रही है. मध्य प्रदेश के कूनाे जंगल में चीताें का सफल संरक्षण जारी है.
 
इसी क्रम में पुणे मनपा के कात्रज स्थित राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय में भी अगले एक साल के भीतर चीताें काे देखने का अवसर मिल सकता है.
 
अफ्रीका के चिड़ियाघराें से चीताें की दाे जाेड़ियां यहां लाई जाएंगी. इनके लिए विशेष बाड़े का निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा.
चीता दुनिया का सबसे तेज दाैड़ने वाला प्राणी है. भारत में पहले बड़ी संख्या में चीते पाए जाते थे, लेकिन 20वीं सदी के मध्य तक शिकार और अन्य कारणाें से इनकी संख्या लगातार घटती गई्.
 
वर्ष 1952 में आधिकारिक ताैर पर चीताें काे भारत से विलुप्त घाेषित कर दिया गया. देश में चीताें का फिर से संरक्षण करने के लिए केंद्र सरकार ने 2022 और 2023 में नामीबिया तथा अफ्रीका से चीताें की जाेड़ियां भारत लाईं.
 
मध्य प्रदेश के कूनाे जंगल में उनके लिए अलग से प्राकृतिक आवास तैयार किया गया. शुरुआत में वहां के वातावरण के अनुकूल हाेने के दाैरान कुछ चीताें की मृत्यु हाे गई. हालांकि, पिछले तीन वर्षाें में चीते वहां के वातावरण में स्थिर हाे गए हैं और उनका प्रजनन भी शुरू हाे गया है. वर्तमान में कूनाे जंगल में चीताें की संख्या 60 तक पहुंच गई है. इनमें वहां जन्मे 41 शावक भी शामिल हैं. इस बीच, नागरिकाें काे चीताें से परिचित कराने के लिए पुणे मनपा ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं. कात्रज स्थित राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय में अगले एक साल के भीतर चीते लाने की याेजना के तहत उनके रहने के लिए विशेष बाड़े की व्यवस्था की जा रही है.
इस संबंध में राजीव गांधी प्राणी संग्रहालय के अधीक्षक राजकुमार जाधव से संपर्क किया गया.
 
उन्हाेंने इस जानकारी की पुष्टि करते हुए बताया कि राजीव गांधी राष्ट्रीय प्राणी संग्रहालय में बाघ और शेर जैसे वन्यजीवाें के साथ जिराफ तथा जेब्रा भी नागरिकाें काे देखने काे मिलें, इसके लिए पहले ही कदम उठाए जा चुके हैं.