सारसबाग, 12 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
जय माता दी के जयघोष, शंखनाद और वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच सारसबाग स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर का परिसर भक्तिमय हो उठा. नवरात्रोत्सव के दूसरे दिन सुबह सैकड़ों महिलाओं और पुरुष श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्रीसूक्त और श्री गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ कर मां महालक्ष्मी की स्तुति की. मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच हुए इस आयोजन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. यह कार्यक्रम श्री महालक्ष्मी मंदिर, सारसबाग की ओर से आयोजित सार्वजनिक नवरात्रोत्सव के अंतर्गत संपन्न हुआ. इस अवसर पर डॉ. सतीश देसाई, मंदिर की प्रमुख ट्रस्टी अमिता अग्रवाल, ट्रस्टी डॉ. तृप्ति अग्रवाल, भरत अग्रवाल, एडवोकेट प्रताप परदेशी, प्रवीण चोरबेले और हेमंत अर्नालकर सहित अन्य ट्रस्टी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे. ट्रस्ट के प्रमुख संस्थापक ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल और प्रमुख ट्रस्टी अमिता अग्रवाल के मार्गदर्शन में कार्यक्रम आयोजित किया गया.
शंखनाद के साथ हुई शुरुआत पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं महिलाओं ने ‘जय माता दी’ के जयघोष से मंदिर परिसर को गुंजायमान कर दिया. कार्यक्रम की शुरुआत शंखनाद दल के वादकों के शंख बजाने से हुई. इसके बाद श्रद्धालुओं को श्रीसूक्त के स्वरूप, उसके महत्व और महिमा की जानकारी दी गई. सामूहिक पाठ के दौरान सबसे पहले ओंकार का उच्चारण किया गया. इसके बाद श्री गणपति अथर्वशीर्ष का एक पाठ और श्रीसूक्त के तीन पाठ किए गए. वैदिक मंत्रों के सामूहिक उच्चारण से मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा. कार्यक्रम का समापन आरती के साथ हुआ. नारी शक्ति के जागरण का दिया संदेश डॉ. तृप्ति अग्रवाल ने कहा कि सामूहिक श्रीसूक्त पाठ के आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को एकजुट कर नारी शक्ति का जागरण करना है. इसी उद्देश्य से हर वर्ष यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. नवरात्रोत्सव के पावन अवसर पर मां महालक्ष्मी की आराधना, भक्तिभाव और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं.
सुख-समृिद्ध का प्रतीक है श्रीसूक्त श्रीसूक्त ऋग्वेद का एक पवित्र वैदिक स्तोत्र है, जो मां महालक्ष्मी की स्तुति के लिए समर्पित है. सुख, समृद्धि, ऐेशर्य, शांति और कल्याण की प्रतीक देवी महालक्ष्मी की उपासना में श्रीसूक्त पाठ का विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि सामूहिक श्रीसूक्त पाठ के माध्यम से भक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और सामूहिक मंगलभाव का संदेश देने का प्रयास किया जाता है. नवरात्रोत्सव के दौरान आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धालुओं को मां महालक्ष्मी की आराधना के साथ आध्यात्मिक वातावरण से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है.