सूरत में लोगों ने शुरु किया 'गांव चलो आंदोलन'

कम मजदूरी तथा शोषण के चलते यूपी-बिहार के लोग छोड़ रहे शहर : स्टेशन पर तांता लगा

    13-Oct-2026
Total Views |
 
Surat
सूरत, 12 अ्नटूबर (वि.प्र.)
सूरत में यूपी-बिहार के लाेगाें ने ‘गांव चलाे आंदाेलन’ शुरू किया है. कम मजदूरी तथा शाेषण के चलते शहर छाेड़ रहे है. स्टेशन पर लाेगाेंं का तांता लगा. लाेगाें ने एक सुर में कहा- 30 दिन काम करने का दबाव. 12-12 घंटे काम लेने से मानसिक और शारीरिक परेशानी बढ़ने लगी है.
 
प्रयागराज के बृजेश निषाद ने कहा-अब खेत में खीरा उगा लेंगे पर अब अत्याचार नहीं सहेंगे. छुट्टी मांगने पर उनकी सैलरी काट ली गई. पूरी दुनिया में डायमंड हब के नाम से मशहूर सूरत की चमक-दमक के पीछे यूपी-बिहार के वाे मजदूर हैं, जाे दिन-रात मेहनत करके इस शहर काे चमकाने में मदद की. चाहे कड़ाके की धूप हाे, मूसलाधार बारिश या बाढ़ जैसे हालात, इन मजदूराें ने कभी काम से मुंह नहीं माेड़ा.
 
लेकिन अब यही मजदूर सूरत से मुंह माेड़ रहे हैं. गुजराती सेठाें की बंधुआ मजदूरी और शाेषण से तंग आकर मजदूराें ने गांव चलाे आंदाेलन शुरू कर दिया है. दिवाली और छठ से पहले ही हजाराें मजदूर अपना बाेरिया-बिस्तर समेटकर घर लाैट रहे हैं, जिससे सूरत के रेलवे स्टेशनाें पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. रेलवे स्टेशन खचाखच भरे नजर आ रहे हैं. मजदूराें का आराेप है कि सूरत की फैक्ट्रियाें में उनका भयंकर शाेषण हाे रहा है. न ताे उन्हें समय पर सैलरी मिलती है और न ही उन्हें वीक ऑफ मिलता है. उनसे महीने में पूरे-पूरे 30 दिन काम लिये जा रहे हैं. अगर काेई काम करने से मना कर देता है ताे उसकी सैलरी रख ली जाती है और धक्के मार के फैक्ट्री से बाहर निकाल दिया जाता है. एक मीडिया हाउस से बात करते हुए मजदूराें ने बताया कि एक तरफ उनपर महीने में 30 दिन काम करने का दबाव बनाया जाता है.