सारसबाग, 13 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) प्लास्टिक नाम का एक बहुत बड़ा राक्षस हमने खुद ही पैदा कर लिया है. हमने जमीन के नीचे पानी का जाना बंद कर दिया और सारा पानी जमीन के ऊपर ही जमा कर रखा है, जो आने वाले भविष्य के लिए सबसे खतरे की घंटी है. इसी वजह से अगले 25 वर्षों में हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती स्वास्थ्यवर्धक भोजन की होगी, यह विचार पद्मश्री पोपटराव पवार ने व्यक्त किए. श्री महालक्ष्मी मंदिर (सारसबाग) की ओर से सार्वजनिक नवरात्रोत्सव के अंतर्गत ‘अन्नदाता शक्ति’ महाराष्ट्र के विभिन्न भागों की महिला किसानों और कृषि उद्यमी महिलाओं’ का सम्मान किया गया. इस अवसर पर वे बोल रहे थे. कार्यक्रम में ट्रस्ट की वेिशस्त (ट्रस्टी) और उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल, भरत अग्रवाल, प्रवीण चोरबेले, एडवोकेट प्रताप परदेशी सहित अन्य ट्रस्टी और पदाधिकारी उपस्थित थे. महाराष्ट्र के विभिन्न भागों की कृषि उद्यमी सुनीताराजे पवार, पूजा बोड़के, प्रिया जाधव, वैशाली भरणे, किसान पूनम गावडे, ताजणे, सुरेखा माने, सुरेखा बनकर, वैशाली पवार उद्यमी डॉ. कृष्णा सोनी, हर्षदा टेमगिरे, श्रावणी ोड़के का सम्मान किया गया. सम्मान स्वरूप महिलाओं को महावस्त्र और स्मृतिचिह्न देकर सम्मानित किया गया. साथ ही, उनके हाथों देवी आरती भी संपन्न हुई.पोपटराव पवार ने कहा कि आदिमानव के काल से हम स्थानांतरित खेती करते आ रहे थे. समय के साथ मनुष्य संरक्षित करने के तरीकों की खोज की और शुरुआत में नदी के तल में रेत के अंदर खेती शुरू हुई. इसके बाद पानी की खोज करके खेतों में काम शुरू हुआ. भले ही यह प्रगति हुई हो, लेकिन आज हमारे सामने कई चुनौतियां भी हैं. भरत अग्रवाल ने कहा, खेती केवल जीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और हमारी अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार है. कृषि व्यवस्था में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है. धूप और बारिश जैसी हर मुसीबत का सामना करते हुए किसान लगातार मेहनत करते रहते हैं. इसलिए, इन महिला किसानों और कृषि उद्यमियों का सम्मान करना हमारे लिए गर्व की बात है. अग्रवाल ने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए महालक्ष्मी मंदिर की ओर से चुनिंदा 10 गांवों में जल प्रबंधन (पानी के नियोजन) का काम किया जा रहा है.
श्री महालक्ष्मी मंदिर (सारसबाग) की ओर से सार्वजनिक नवरात्रोत्सव के दौरान मंदिर में तेजस्विनी ग्रुप द्वारा मनवदुर्गा स्थिर लेजिम (पारंपरिक लोकनृत्य) की प्रस्तुति दी गई. पारंपरिक लेजिम के खेल को मंदिर में प्रस्तुत करते हुए देवी की विभिन्न कथाओं को उजागर किया गया.