आदमी क्राउड में, भीड़ में जीना पसंद करता है, अकेले में घबराता है. क्याेंकि अकेले में बिल्कुल अकेली लहर रह जाती है, जाे दाेनाें तरफ से िफसल रही है, गिर रही है, मिट रही है, मिटने के करीब पहुंच रही है. इसलिए संगठन बनाता है, इसलिए श्रृंखला बनाता है.
बाप कहता है कि मैं मिट जाऊंगा, काेई िफक्र नहीं, लेकिन बेटे काे छाेड़ जाता हूं. लहर कहती है, मैं मिट जाऊंगी, लेकिन मैं एक छाेटी लहर उठाए जाती हूं. वह ताे जीएगी, मेरी श्रृंखला रहेगी, मेरा नाम रहेगा.
इसलिए बाप काे बेटा न हाे ताे बड़ा दुख हाेता है, क्याेंकि वह अमरत्व का काेई इंतजाम न कर पाया. वह ताे मिटेगा, लेकिन एक दूसरी लहर काे पैदा न कर पाया जाे आगे चलती चली जाये, जाे कम से कम इतना ताे रहे कि हां उस लहर से पैदा हुई थी. वह लहर मिट गई, काेई बात नही, लेकिन एक लहर पीछे छूट गई है.
इसलिए ध्यान आपने कभी दिया हाे न दिया हाे, जिन लाेगाें काे जीवन में काेई सृजनात्मक गतिविधि हाेती है- जैसे काेई पेंटर, काेई चित्र बनाने वाला, काेई संगीतज्ञ, काेई कवि, काेई लेखक- उनकाे बेटा पैदा करने की इतनी िफक्र नहीं हाेती. और इसका कुल कारण इतना है कि वे बेटे के सब्स्टीट्यूट काे पा जाते हैं. उनकी पेंटिंग जिंदा रहेगी, उनकी कविता जिंदा रहेगी, उनकी मूर्ति जिंदा रहेगी, उनकाे बेटे की काेई िफक्र नहीं. इसलिए वैज्ञानिक, चित्रकार, मूर्तिकार, लेखक, कवि इतनी िफक्र नहीं करते बेटे-बेटे की. उसका और काेई कारण नहीं है, उन्हाेंने एक दूसरा बेटा पा लिया है. उन्हाेंने एक लहर पैदा कर दी, जाे जिंदा रहेगी. और आपसे ज्यादा देर तक टिकने वाला बेटा पा लिया है. क्याेंकि जब आपके बेटे खाे जायेंगे, तब भी उनकी किताब रहेगी.
इसलिए साहित्यकार बहुत िफक्र में नहीं रहता कि उसका बेटा हाे जाये, संतति हाे जाये, उसकी चिंता नहीं है उसे. इसका मतलब यह नहीं है कि वह निश्चिंत है.
इसका कुल मतलब इतना है कि उसे थाेड़ी लंबी देर तक टिकने वाली लहर मिल गई है. अब वह िफक्र छाेड़ता है छाेटी लहराें की.
इसलिए परिवार में वह उत्सुक नहीं है. उसने और तरह का परिवार बना लिया है. वह भी उतनी ही अमरता की चेष्टा में लगा हुआ है. इसलिए साहित्यकार कहेगा कि धन खाे जायेगा, संपत्ति खाे जायेगी, लेकिन शास्त्र रहेंगे उसकी वही आकांक्षा है. शास्त्र भी खाे जाते हैं.
काेई शास्त्र नहीं रह जाता. हां, थाेड़ी ज्यादा देर तक रहता है. कितने शास्त्र खाे गये, कितने शास्त्र राेज खाेते चले जायेंगे. सब खाे जायेगा. असल में लहराें की दुनिया में कितनी ही लंबी काेई लहर चली जाये, खाेएगी ही. लहर हाेने का मतलब खाेना है, लंबाई का काेई फर्क नहीं पड़ता है.