छोटी बच्ची ने खोजा था अल्तामिरा गुफाओं का रहस्य

    15-Oct-2026
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Osho 
1880 में यूराेप में अल्तामिरा की गुफाएं खाेजी गयीं और उन गुफाओं की खाेज के वक्त एक बहुत मजेदार घटना घटी. एक बहुत बड़े जमींदार डान मार्शिलानाे की जमीन पर अचानक पहाड़ियाें में ये गुफाएं मिल गयीं. एक कुत्ता भूल से गुफा के भीतर कूद गया. वर्षा में कुछ मिट्टी गलकर गिर गयी; गड्ढा हाे गया; और कुत्ता उसमें अंदर चला गया, फिर निकल न पाया. वहां उसने बहुत शाेरगुल मचाया. तब मर्शिलानाे के किसान, मजदूर जाकर किसी तरह खाेदकर कुत्ते काे निकाले. कुत्ता ताे निकल आया, साथ में गुफाओं का आविष्कार हाे गया. बड़ी गहरी और बड़ी अद्भुत गुफाएं थीं. मनुष्य के पूरे इतिहास की दृष्टि उन गुफाओं ने बदल दी.
 
मार्शिलानाे काे पता चला, ताे वह इतिहास का विद्यार्थी था, उसने तत्काल सब इन्तजाम किया. विशेषकर वह मनुष्य की हड्डियाें का अध्ययन कर रहा था वर्षाें से. ताे उसने साेचा कि ये गुफाएं न मालूम कितनी पुरानी हाेंगी, ताे कीमती हड्डियां इसमें मिल सकती हैं, और किसानाें ने खबर दी कि बहुत अस्थिपंजर हैं. ताे मार्शिलानाे ने सर्चलाइट लेकर गुफाओं काे खुदवाया और उनमें प्रवेश किया. छह दिन तक राेज घण्टाें वह सरक कर गुफाओं में जाता, एक-एक हड्डी पर नजर रखता. हड्डियां खाेजीं उसने बहुत. सातवें दिन उसकी छाेटी लड़की ने, जाे सात-आठ साल की लड़की थी, उसने कहा, मैं भी अंदर चलना चाहती हूं. वह लड़की काे ले गया.
 
आप जानकर हैरान हाेंगे कि अल्तामिरा की असली गुफाएं उस लड़की ने खाेजीं, उस सात साल की लड़की ने. सर्चलाइट लेकर वह जाे इतिहासज्ञ पिता था, वह नहीं खाेज पाया. बड़ी अद्भुत घटना घटी. जब वह लड़की काे लेकर गया, ताे वह सरक कर अपनी हड्डियाें की जांच-पड़ताल में लग गया कि जमीन में एक हड्डी भी चूक न जाये; सर्चलाइट पास था. अचानक लड़की चिल्लाई, ‘पिताजी, पिताजी, ऊपर देखिए.’ छह दिन से जा रहा था वह राेज, लेकिन उसने ऊपर आंख ही नहीं उठायी थी. वह नीचे हड्डियां बीनने में इतना व्यस्त था कि गुफाओं के ऊपर सीलिंग पर ्नया है, उसने नजर न डाली थी. सीलिंग पर ताे इतने अद्भुत चित्र थे, जैसे कल रंग गये हाें. और ठेठ बीस हजार साल पुराने चित्र निकले.
 
अल्तामिरा की गुफाएं सारे जगत् में प्रसिद्ध हाे गयीं उन चित्राें के कारण. इतने अद्भुत चित्र थे कि जिसने भी उन्हें बनाया हाेगा, पिकासाे से कम सामर्थ्य का चित्रकार नहीं था. ताे सारा इतिहास बदलना पड़ा. क्योंकि खयाल था कि पुराने जमाने में ताे किसी आदमी के पास इतनी बड़ी कला नहीं हाे सकती. लेकिन पाया यह गया कि वह जाे अल्तामिरा की गुफाओं पर, जानवराें के जाे चित्र हैं, सांड के चित्र हैं, वे इतने कलात्मक हैं और इतने अद्भुत हैं कि आज भी काेई चित्रकार उनका मुकाबला नहीं कर सकता. हैरान हुआ मर्शिलानाे, कि वह छह दिन से सर्चलाइट लेकर आ रहा था, लेकिन सर्चलाइट उसका जमीन पर लगा था. वह हड्डियां खाेज रहा था कि काेई हड्डी चूक न जाये. ताे ऊपर नजर नहीं गयी.
 
यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि हम सब भी जब तक प्रकृति में हड्डियां खाेजते रहते हैं..... बड़ा सर्चलाइट हमारे पास है. लेकिन ऊपर सीलिंग की तरफ नहीं उठ पाता, वह परमात्मा की तरफ नहीं उठ पाता. टू मच ऑ्नयुपाइड; जमीन पर सरकने में. और प्रकृति में खाेज करने में -- हड्डियाें की ही खाेज है; कुछ और बहुत खाेज नहीं है. जब आप कामवासना में खाेज रहे हैं, तब भी हड्डियाें से ज्यादा कुछ भी नहीं खाेज रहे हैं. हड्डियाें की सुरक्षा खाेज रहे हैं; और कुछ भी नहीं खाेज रहे हैं. जब आप शक्ति खाेज रहे हैं, ताे हड्डियाें के लिए केवल इन्तजाम कर रहे हैं स्नियाेरिटी का; और कुछ भी नहीं कर रहे हैं.