तिलक रोड, 14 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) अच्छे लोकेशन और किफायती कीमत पर घर खरीदने को लोगों की प्राथमिकता दिख रही है. कोरोना के बाद लोगों की मानसिकता में एक बदलाव यह आया है कि लोगों को बड़ा घर चाहिए, अच्छी सोसायटी चाहिए. बड़ी जगह और भरपूर स्पेस के लिए ग्राहक अच्छे रेट चुकाने को भी तैयार हैं. वर्तमान में रियल एस्टेट मार्केट में थोड़ी मंदी है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक नहीं टिकेगी. एक बार फिर मार्केट पटरी पर आ जाएगा. इसके लिए सरकार को भी थोड़ी पहल करके कुछ रियायतें देनी चाहिए, ताकि रियल एस्टेट मार्केट को और अंततः ग्राहकों को भी अच्छे घर मिल सकें, ऐसा विचार मित्तल ग्रुप के डायरेक्टर डॉ. नरेश मित्तल ने व्यक्त किया. फिलहाल दशहरा- दिवाली के त्यौहारों की पृष्ठभूमि में वे ‘आज का आनंद’ से रियल एस्टेट मार्केट की स्थिति और उसके भविष्य के विषय पर चर्चा कर रहे थे. पिछले कुछ महीनों से जारी युद्ध, पेट्रोल और डीजल को लेकर बनी अनिश्चितता, निर्माण की बढ़ी हुई लागत और होम लोन की ब्याज दरें इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने ‘आज का आनंद’ के पाठकों को रियल एस्टेट मार्केट के बारे में बहुत ही सरल शब्दों में जानकारी दी. डॉ. नरेश मित्तल ने कहा कि आजकल लोगों की पसंद अच्छा लोकेशन होता है. घर स्पेशियस और अच्छी जगह पर होना चाहिए. इसके अलावा, यदि कीमत भी अच्छी मिल जाए, तो लोग उसे खरीद भी लेते हैं. लेकिन वर्तमान में घरों की आपूर्ति (सप्लाई) बहुत अधिक है. यानी, तीन-चार साल पहले मार्केट जैसा था, वैसा अब नहीं है. इसलिए फ्लैट खरीदने में निवेशकों (इन्वेस्टर्स) की संख्या थोड़ी कम हो गई है. पिछले कुछ समय में एक तो कीमतें अधिक हैं, इसके अलावा सप्लाई भी बहुत ज्यादा हो गई है. एफएसआई चार-पांच गुना होने के कारण सप्लाई एकदम बढ़ गई है और इसका असर अब दिखाई देने लगा है. स्लो डाऊन की यह स्थिति केवल पुणे में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में है. युद्ध और अन्य कारणों से निर्माण लागत (कन्स्ट्रक्शन कॉस्ट) बढ़ गई है. जो लोग घर खरीदना चाहते हैं, वे कीमतें बढ़ने के कारण थोड़ा रुककर कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे हैं.
कम चार्जेस और जल्द मंजूरी से हमारे लिए भी घर बेचना आसान हो जाएगा
पुणे की रियल एस्टेट इंडस्ट्री बहुत अच्छी है और आगे भी अच्छी ही रहेगी. बस थोड़े समय के लिए ही इसमें स्लोडाउन स्थिति आई है. स्थितियां फिर से बिल्कुल ठीक हो जाएंगी, और इसके लिए सरकार को थोड़ा सहयोग देना चाहिए. प्रोजेक्ट्स की मंजूरी के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय होनी चाहिए कि इतने समय के भीतर प्रोजेक्ट मंजूर हो जाना चाहिए और काम शुरू हो जाना चाहिए. इसमें दो मुख्य मुद्दे अहम हैं. एक तो यह कि मंजूरी के लिए जो चार्जेस लिए जाते हैं, उनमें बिल्डर्स को थोड़ी राहत मिलनी चाहिए. डेवलपमेंट चार्जेस, एनओसी चार्जेस और पेड एफएसआई जैसे कई तरह के चार्जेस होते हैं, जिनमें छूट मिलनी चाहिए. इसके अलावा, प्रोजेक्ट पास होने में बहुत अधिक समय लगता है. यदि इस समय की बचत हो जाए, तो फ्लैटों की कीमतें खुद-ब-खुद कम हो जाएंगी. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रोजेक्ट शुरू होने में जितनी देर होती जाती है, उतना ही उसका ब्याज चुकाना पड़ता है, खर्च बढ़ता जाता है और आखिरकार वह र् ग्राहकों को ही उठाना पड़ता है. लेकिन अगर मंजूरी मिलने में कम समय लगे, तो हमारे लिए भी घर बेचना आसान जाएगा और आम लोगों को भी घर थोड़े कम दामों में मिल सकेंगे. -डॉ. नरेश मित्तल,संचालक, मित्तल ग्रुप
किफायती मकानों को लेकर टैक्स की संरचना में बदलाव जरुरी
सरकार को किफायती मकानों के लिए घर की कीमत की मौजूदा सीमा 45 लाख रुपये से बढ़ाकर 70 लाख रुपये कर देनी चाहिए. इसका कारण यह है कि जब सरकार ने पहले नियम बनाए थे, तब से अब तक मकानों की कीमतें बहुत बढ़ चुकी हैं. इसलिए, कर की संरचना भी इसके अनुरूप होनी चाहिए. कोरोना काल के बाद जब सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी थी, तब इसका बहुत अच्छा परिणाम देखने को मिला था. ग्राहकों को स्टाम्प ड्यूटी में छूट का लाभ दिया जाना चाहिए अथवा बिल्डरों के लिए इन्कम टैक्स फ्री योजनाएं फिर से लागू की जानी चाहिए. यदि सरकार जीएसटी घटाकर 1% कर देती है और स्टाम्प ड्यूटी 3% कर देती है, तो आम लोगों को काफी राहत मिलेगी. इससे रियल एस्टेट क्षेत्र का कारोबार बढ़ेगा और सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी.