सांगवी जिला अस्पताल दुर्दशा का शिकार

62 साल पुराने हॉस्पिटल में आग लगने की 3 घटनाएं 5 वर्षों से नहीं कराया फायर सेफ्टी ऑडिट

    15-Oct-2026
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FireSafety 
सांगवी, 14 अक्टूबर (आ.प्र.)
आर्थिक रूप से वंचित राेगियाें काे मुफ्त इलाज प्रदान करने वाले पुराने सांगवी स्थित जिला अस्पताल के सामने अग्नि सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं काे लेकर गंभीर सवाल खड़े हाे गए हैं. 62 साल पुरानी इस बिल्डिंग में 18 महीनाें में आग लगने की तीन घटनाएं हाे चुकी हैं और रिपाेर्ट के अनुसार, 2021 के बाद से इसका फायर सेफ्टी ऑडिट (अग्नि सुरक्षा लेखा परीक्षा) नहीं कराया गया है. मरीजाें और उनके रिश्तेदाराें ने अस्वच्छ शाैचालयाें, पीने के पानी की कमी, खराब लिफ्टाें और जगह की कमी की भी शिकायत की है. अस्पताल में 200 से अधिक मरीज भर्ती हाेते हैं और इसके आउटपेशेंट विभाग (ओपीडी) में प्रतिदिन लगभग 300 लाेग आते हैं. रिपाेर्ट में कहा गया है कि हर छह महीने में फायर ऑडिट कराना अनिवार्य है, फिर भी 2021 से काेई ऑडिट नहीं किया गया है.
आराेप है कि अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) पुराने हाे चुके हैं और आपातकालीन सुरक्षा प्रणालियाें काे अपर्याप्त बताया जा रहा है. अस्पताल में डेढ़ साल में आग लगने की तीन घटनाएं हाे चुकीं हैं.
 
17 नवंबर 2024 काे विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) से सटे एक स्टाेररूम में आग लग गई. 16 अप्रैल 2026 काे उसी क्षेत्र में एक अन्य आग की घटना घटी, जब दीवार पर लगा पंखा गर्म हाे गया और शाॅर्ट सर्किट का कारण बना. उस समय एसएनसीयू में 15 नवजात शिशुओं का इलाज चल रहा था और कर्मचारियाें की सतर्कता ने एक बड़े हादसे काे टाल दिया. आग की तीसरी घटना 18 जून 2026 काे पुराने सघन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के बैकअप यूनिट में शाॅर्ट सर्किट की सूचना मिली. इन लगातार घटनाओं ने अस्पताल के बिजली के संस्थापनाें (इलेक्ट्रिकल इंस्टाॅलेशन), निरीक्षण की नियमितता और पहचानी गई कमियाें का समाधान किया गया है या नहीं, इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फायर अलार्म, हाइड्रेंट, स्पिंकलर, फायर दरवाजे, आपातकालीन निकास, प्रकाश व्यवस्था, फायर पंप, पानी की उपलब्धता, स्टाफ प्रशिक्षण और फायर ड्रिल के व्यापक निरीक्षण के लिए काॅल किए गए हैं.
 
छत पर ज्वलनशील सामग्री का जमा हाेना फायर सेफ्टी पर सवाल हाॅस्पिटल की छत पर क्षतिग्रस्त लाेहे के बेड, गद्दे, प्लास्टिक की कुर्सियां और फेंकी हुई मेडिकल सामग्री रखी हुई हैं. स्वच्छता संबंधी चिंताओं के अलावा, ज्वलनशील सामग्री का जमा हाेना आग की सुरक्षा के प्रति और सवाल खड़े करता है. अस्पताल में महिला राेग, प्रसूति, पुरुष राेगी, आईसीयू, नवजात आईसीयू और बाल राेग विभागाें में कुल 300 बिस्तराें की क्षमता है.
 
हालांकि, तीसरी मंजिल महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नाशिक काे आवंटित की गई है, जिससे अस्पताल के पास अपने संचालन के लिए केवल दाे मंजिलें बची हैं. इसके तीन लिफ्टाें में से एक लगभग 15 साल पुरानी है, इसकाे पूर्ण रूप से बदलने की आवश्यकता है, जिससे व्यस्त घंटाें के दाैरान दबाव बढ़ जाता है. हाॅस्पिटल में केवल दाे लिफ्ट ही चालू हैं.