लाेनावला, 15 अ्नटूबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
लाेनावला के नांगरगांव क्षेत्र में स्थित एक आलीशान विला के बंगले में चल रहे कथित अवैध काॅल सेंटर का लाेनावला शहर पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए रैकेट का भंडाफाेड़ किया है. इस काॅल सेंटर के माध्यम से अमेरिका, कनाडा और अन्य देशाें के नागरिकाें से धाेखाधड़ी कर उनसे वसूली करने का आराेप लगाया गया है.
इस मामले में पुलिस ने 20 लाेगाें के खिलाफ लाेनावला शहर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है. पुलिस ने उनके पास से लैपटाॅप, माेबाइल, वाहन और नकदी सहित कुल 36 लाख 41 हजार 30 रुपये का सामान जब्त किया है. इस मामले में आराेपियाें काे एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है. इस मामले में लाेनावला शहर पुलिस स्टेशन के पुलिस हवलदार बालासाहेब अरुण खड़के (उम्र 38 वर्ष) ने लाेनावला शहर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है.
अमान इम्तियाज शेख (उम्र 21 वर्ष), माेहम्मद फैज उर्फ नाजिश आरिफ शेख (उम्र 26 वर्ष), रिहान सलम घनानी (उम्र 19 वर्ष), माेहम्मद अलीरजा सैयद (उम्र 21 वर्ष), तावीश मेहबूब अली शेख (उम्र 20 वर्ष), कामरान इसामुद्दीन शेख (उम्र 20 वर्ष), सद्दाम चांद खान (उम्र 30 वर्ष), जहीर वाहिद खान (उम्र 21 वर्ष), जाहिद आजम शेख (उम्र 20 वर्ष), शादाब जावेद सैयद (उम्र 26 वर्ष), इरफान अब्दुल गफूर शेख (उम्र 41 वर्ष), समीर इरफान शेख (उम्र 33 वर्ष), इरशाद इरफान शेख (उम्र 32 वर्ष), अमीर सिराज खान (उम्र 31 वर्ष), मकसूद शमीम चाैधरी (उम्र 20 वर्ष), माेहम्मद अफजल शेख हर्षद शेख (उम्र 26 वर्ष), अब्दुल आहात माेहम्मद रफीक खान (उम्र 22 वर्ष, सभी निवासी मालवणी, मालाड, मुंबई), कुलदीप मनाेज बागड़ी (उम्र 37 वर्ष, निवासी माटुंगा, मुंबई), सुजल खुमबहादुर राणा (उम्र 35 वर्ष, निवासी शिलांग, मेघालय), धनराज देवजीत बाेस (उम्र 26 वर्ष, निवासी बदलापुर, ठाणे) अवैध काॅल सेंटर मामले में गिरफ्तार किए गए लाेगाें के नाम हैं.
लाेनावला शहर पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बुधवार, 14 अक्टूबर काे सुबह चार बजे से शाम छह बजे के दाैरान लाेनावला के नांगरगांव क्षेत्र में स्थित ओमेगा साेसाइटी परिसर के एक विला में यह मामला चल रहा था. आराेपियाें पर सांठगांठ कर किराए पर लिए गए इस विला में अनधिकृत काॅल सेंटर शुरू करने का आराेप लगाया गया है.
पुलिस की शिकायत के अनुसार, इस जगह पर इंटरनेट के माध्यम से विदेशी नागरिकाें से संपर्क साधने के लिए लैपटाॅप, माेबाइल और विभिन्न ऐप्स का उपयाेग किया जा रहा था. अमेजन, गूगल जैसी नामचीन कंपनियाें के प्रतिनिधि हाेने का ढाेंग रचकर फर्जी दस्तावेजाें व पहचान पत्राें के आधार पर नागरिकाें का विश्वास हासिल किया जा रहा था.