यूपीआई पर लगने वाला शुल्क पूरी तरह समाप्त किया जाए

विभिन्न व्यापारी संगठनों की केंद्र सरकार से मांग; एमडीआर शुल्क समाप्त कराने प्रयास जारी रखेंगे

    16-Oct-2026
Total Views |
 
vdf
गुलटेकड़ी, 15 अक्टूबर (आ.प्र.)

व्यापारियों की मांग पर ध्यान देते हुए केंद्र सरकार ने चुनिंदा व्यापारी यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले मर्चें ट डिस्काउंट रेट को दिवाली तक न वसूलने का निर्णय लिया है. व्यापारियों का मानना है कि इस शुल्क को पूरी तरह से खत्म किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक यूपीआई लेन-देन पर लगने वाला एमडीआर शुल्क पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता, तब तक व्यापारी इस मुद्दे पर लगातार विरोध जारी रखेंगे. व्यापारी वर्ग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े तथा व्यापारी और ग्राहकों के बीच लेनदेन सुचारू रूप से चलता रहे, इसलिए यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क न लगाया जाए - यह रुख व्यापारी संगठनों ने पहले ही दिन से अपनाया है. इस सब के परिणामस्वरूप, दिवाली तक इस फैसले के क्रियान्वयन को आगे बढ़ा दिया गया है. इससे व्यापारियों को तात्कालिक राहत तो मिली है, लेकिन व्यापारी संगठनों का मानना है कि शुल्क लगाने के इस निर्णय को स्थायी रूप से रद्द किया जाना आवश्यक है.  
 
नीति निर्माताओं के साथ बातचीत जारी रहेगी
वर्तमान लेन-देन को देखें तो यूपीआई का उपयोग बहुत बढ़ गया है. हमारी जानकारी के अनुसार, भारत में हर महीने 30 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन यूपीआई के माध्यम से होते हैं. यदि 0.4 प्रतिशत का भी हिसाब लगाया जाए, तो सरकार को इसके जरिए 12 हजार करोड़ रुपये भरने पड़ते. हालांकि, यह निर्णय टल जाने से व्यापारियों और ग्राहकों को काफी राहत मिली है. व्यापारियों का कहना है कि 0.4 प्रतिशत भी एक बड़ी रकम होती है. इसके बजाय यदि चरणबद्ध तरीके से और कम मात्रा में कर लिया जाए, तो व्यापारियों और ग्राहकों पर इसका भारी असर नहीं पड़ेगा. हम आगामी दिनों में स्थानीय स्तर पर व्यापारियों को जागरूक करने और नीति निर्माताओं के साथ मिलकर डिजिटल भुगतान को और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए काम करते रहेंगे. -विकास मुंदड़ा,अध्यक्ष, कैट (पुणे जिला)  
 

 vdf
 
फिलहाल यह केवल एक अस्थायी राहत है

 केंद्र सरकार ने एमडीआर शुल्क को लागू करने का निर्णय दिवाली के बाद लेने की घोषणा की है. हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं. हालांकि, यह केवल एक अस्थायी राहत है. जब तक यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर शुल्क पूरी तरह से समाप्त नहीं कर दिया जाता, तब तक व्यापारियों की ओर से हमारा प्रयास जारी रहेगा. व्यापारियों के हितों की रक्षा करना चेंबर का मुख्य उद्देश्य है. इसलिए, केंद्र सरकार को व्यापारियों की भावनाओं और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर शुल्क लगाने का निर्णय पूरी तरह से वापस लेना चाहिए. - राजेंद्र बाठिया,अध्यक्ष, दि पूना मर्चेंटस्‌‍ चेंबर
 

vdf 
 
यूपीआई पेमेंट के मामले में भी छूट दें

यूपीआई पर एमडीआर एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है. पहले लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत डाली गई और अब उस पर यह टैक्स लगाया जा रहा है. यह कौन सा न्याय है..? यूपीआई पेमेंट पर लगने वाले किसी भी चार्ज का अंतिम बोझ ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा. अगर व्यापारी यह चार्ज वसूल न भी करें, तो भी सामान की बुनियादी कीमत बढ़ जाएगी. हमारा यह कहना है कि जब डिजिटल भुगतान का दायरा और मात्रा बढ़ेगी, तो उसका खर्च अपने आप निकल जाएगा. उसे इस तरह से वसूलने की कोई आवश्यकता ही नहीं है. सरकार जैसे अन्य कई क्षेत्रों को अलग-अलग माध्यमों से मदद या छूट देती है, वैसी ही छूट उन्हें यूपीआई पेमेंट के मामले में भी देनी चाहिए. -फतेचंद रांका, अध्यक्ष, पुणे व्यापारी महासंघ
 
 
vdf