यह ‌‘उस‌’ मूक प्राणी का आशीर्वाद है

    16-Oct-2026
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इंग्लैंड के विख्यात कवि और संगीतकार जार्ज हर्बर्ट के जीवन का प्रसंग है. शहर के टाउन हॉल में हर्बर्ट के संगीत का कार्यक्रम रखा गया था. टाउन हॉल हर्बर्ट के घर से ज्यादा दूर नहीं था, इसलिए पैदल चलकर ही उन्होंने वहां जाने के लिये प्रस्थान किया. रास्ते में सड़क पर भीड़ जमा थी. जार्ज हर्बर्ट रुके, ‌‘क्या हुआ?‌’ कल बहुत अधिक वर्षा हुई थी, गटर का ढक्कन खुल गया होगा उसमें घोड़े के दोनों पैर फंस गये. घोड़ा और घोड़ेवाला दोनों ही कब से लगे हुए है, लेकिन घोड़ा निकल नहीं पाया, किसी ने बताया. हर्बर्ट ने देखा, बेचारा घोड़ेवाला अकेले लगा हुआ है. अकेले आदमी से घोड़े को बाहर निकाल पाना असंभव है. इन भद्र लोगों के लिए घोड़े की पीड़ा से अपने साफ-सुथरे कपड़ों का मूल्य अधिक है अन्यथा इस दुःख से तड़पते मूक प्राणी को देखकर कोई कैसे रह सकता है? हर्बर्ट ने अपना कोट उतारा और उसे एक तरफ रख दिया. वह घोड़े वाले की मदद में लग गया. गंदे पानी में से घोड़े के पैर बाहर खिंचते हर्बर्ट के कपड़े कीचड़ से सन गये. गड्ढ े में से बाहर आकर हर्बर्ट ने घड़ी की ओर नजर की. कार्यक्रम शुरू होने में थोड़े ही क्षण बाकी थे. घर जाकर कपड़े बदलने का समय नहीं था. कोट पहनकर टाउन हॉल की तरफ हर्बर्ट ने प्रस्थान किया. उनके सहायक संगीतकार ने कहा कि, साहब आज कार्यक्रम जम नहीं पायेगा. आपके कपड़े बिगड़ गये हैं. हर्बर्ट बोले, नहीं, नहीं. यदि मैंने कपड़े बिगड़ने के डर से दुःख से तड़पते हुए घोड़े को छोड़कर कार्यक्रम शुरू किया होता तो मेरा चित्त बेचैन हो जाता. मेरा कण्ठ बेसुरा हो जाता. अब मैं संतोषपूर्वक गा सकूंगा जिन लोगों को मेरा संगीत सुनना है उन्हें तो संतोष ही होगा.उस दिन संगीत का कार्यक्रम बहुत सफल गया. लोग वाह-वाह करने लगे. एक प्रशंसक ने कहा, आपके गले से इतना मधुर संगीत आज तक मैंने कभी नहीं सुना. यह उस मूक प्राणी का आशीर्वाद है, हर्बर्ट ने उत्तर दिया. - आचार्य श्री मुनिचंद्रसूरेीशरजी म. सा. श्रावस्ती जैन संघ, गुलटेकड़ी - पुणे