तिराना, 16 अ्नटूबर (वि.प्र.)
यूराेपीय देश अल्बानिया की राजधानी तिराना में महंगी शिक्षा के खिलाफ हजाराें छात्र सड़काें पर उतर आए. प्रदर्शनकारियाें ने जाेरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किए.
इसके बाद कई सरकारी इमारताें में आग लगा दी. इसके साथ ही कई बैंकाें काे भी फूंक डाला. प्रधानमंत्री एदी रामा से इस्तीफा मांगा है. आक्राेश छात्राें ने उनके कार्यालय में भी ताेड़फाेड़ की.
पुलिस ने आंसू गैस के गाेले छाेड़े. झड़प में दर्जनाें लाेग घायल हाेने की खबर मिली है. बता दें कि पूरे अल्बानिया मेें अफरातफरी का माहाैल है. सूत्राें के अनुसार अब तक 11 देशाें में छात्राें के आंदाेलन से वहां की सरकारें भारी दबाव में आ गईं हैं. अल्बानिया में जारी यह विराेध ऐसे समय हाे रहा है, जब भारत, फ्रांस, जर्मनी समेत दुनिया के कुल 11 देशाें में छात्र अपनी मांगाें काे लेकर आंदाेलन कर रहे हैं.
अल्बानिया में छात्राें की नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी है. वे कई महीनाें से पढ़ाई के बढ़ते खर्च और डिग्री लेने के बाद नाैकरी मिलने की कम संभावनाओं काे लेकर आवाज उठा रहे हैं.
छात्राें का कहना है कि शिक्षा महंगी हाेती जा रही है, जबकि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी राेजगार के पर्याप्त माैके नहीं मिल रहे हैं. छात्राें का आराेप है कि सरकार ने बातचीत करने के बजाय उनकी छवि खराब करने की काेशिश की. एदी रामा 2013 से अल्बानिया के प्रधानमंत्री हैं. पिछले साल मई में वे चाैथी बार इस पद पर चुने गए थे. हालांकि, इसके बाद उनकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियाें पर लगे भ्रष्टाचार के आराेपाें काे लेकर लाेगाें में नाराजगी बढ़ी है. माैजूदा प्रदर्शन रामा के लिए अब तक के सबसे गंभीर जन विराेध में से एक माने जा रहे हैं.
सरकार के खिलाफ विराेध कुछ महीने पहले ही शुरू हाे गया था. इसकी एक वजह देश के दक्षिणी तट पर लग्जरी रिसाॅर्ट बनाने की याेजना भी है. इस परियाेजना से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर जुड़े हैं. गुरुवार काे राॅयटर्स से बातचीत में रामा ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी. उन्हाेंने कहा कि सरकारें लाेकतांत्रिक चुनावाें से बदलती हैं.
पिछले साल देश में चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं. दिसंबर 2018 में भी अल्बानिया के छात्राें ने शिक्षा का खर्च बढ़ने के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया था. उस आंदाेलन के दबाव में एदी रामा काे मंत्रिमंडल में बदलाव करना पड़ा था. उन्हाेंने आठ मंत्रियाें काे हटाया और विश्वविद्यालयाें की समस्याएं दूर करने के लिए ‘पैक्ट फाॅर द यूनिवर्सिटी’ नाम से कई कदम उठाने का ऐलान किया था.