इन दिनाें ब्राउन राइस की बड़ी चर्चा है. हर काेई ब्राउन राइस खाने की ही सलाह देता दिख रहा है. कई स्टडीज में भी यह साबित हुआ है कि व्हाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस सेहत के लिए बेहतर है.
आखिर यह ब्राउन राइस है ्नया? दरअसल, हम आमताैर पर जाे चावल खाते हैं यानी व्हाइट राइस, उसी का बगैर रिफाइन्ड रूप है ब्राउन राइस. ब्राउन राइस काे हेल्दी क्यों माना जाता है? इसकी सबसे बड़ी वजह है इसमें पाई जाने वाली परतें. चावल में मूलत : तीन परतें हाेती हैं-ब्रान, जर्म और एंडाेस्पर्म. ब्रान और जर्म में प्राेटीन, फाइबर्स और आयरन भरपूर हाेता है.
एंडाेस्पर्म में ज्यादातर कार्बाेहाइड्रेट हाेते हैं. लेकिन जब चावल काे रिफाइन्ड किया जाता है जाे उसकी ब्रान और जर्म दाेनाें परतें हट जाती हैं. इस तरह व्हाइट राइस में केवल कार्बाेहाइड्रेट ही रह जाते हैं. और इसलिए यह चावल सेहत के लिए नुकसानदायक बन जाता है. चूंकि ब्राउन राइस में ये तीनाें परतें माैजूद हाेती हैं. इसलिए इसमें कार्बाेहाइड्रेट के साथ-साथ प्राेटीन, फाइबर्स और अन्य पाेषक तत्व भी हाेते हैं जिस वजह से ब्राउन राइस, सफेद चावल की तुलना में फायदेमंद बन जाता है.
आइए विस्तार से जानते हैं कि ब्राउन राइस में काैन-से तत्व ऐसे हाेते हैं जाे व्हाइट राइस की तुलना में हमारे लिए ज्यादा फायदेमंद हैं : अपेक्षाकृत ज्यादा फाइबर यानी माेटे लाेग खाएं ताे चिंता की बात नहीं व्हाइट राइस की तुलना में ब्राउन राइस में फाइबर्स ज्यादा हाेते हैं. प्रति 100 ग्राम ब्राउन राइस में फाइबर्स की मात्रा करीब 2 ग्राम हाेती है, जबकि व्हाइट राइस में एक ग्राम से भी कम. ब्राउन राइस में फाइबर्स ज्यादा हाेने से इन्हें खाने पर सेटिस्फै्नशन ज्यादा मिलता है और पेट भी ज्यादा देर तक भरा रहता है. इसलिए माेटापे से ग्रस्त लाेग भी बगैर किसी ज्यादा जिंता के ब्राउन राइस खा सकते हैं.