नई दिल्ली, 16 अ्नटूबर (वि.प्र.)
देश की 24 कराेड़ आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं से काेसाे दूर है. यह महत्वपूर्ण जानकारी ‘गरीबी सूचकांक’ के आंकड़े ने देते हुए केंद्र सरकार के गरीबी दूर करने के दावाें की पाेल खाेल दी है. 20 प्रतिशत और आबादी पर गरीबी के दायरे में आने का खतरा बरकरार है. लगभग 50 कराेड़ कामगार अनआर्गनाइज्ड से्नटर में काम कर रहे हैं. हर 10 में से 9 के पास नाैकरी की काेई गारंटी नहीं है. 25 कराेड़ लाेगाें के गरीबी रेखा से बाहर निकलने के दावे पर भी गंभीर सवाल है. मुश्किलें बरकरार हैं. विस्तार से प्राप्त खबराें के अनुसार संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीसी) और ऑक्सफाेर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से जारी वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के नए आंकड़े सामने आए.
इनमें एक तरफ ताे यह बताया गया कि भारत में पिछले कुछ सालाें में गरीबी की दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन दूसरी तरफ यह भी साफ हुआ कि देश की 23.8 कराेड़ से ज्यादा आबादी आज भी बुनियादी सुविधाओं से दूर है. करीब 19 प्रतिशत आबादी पर गरीबी के दायरे में आने का खतरा बना हुआ है. गरीबी घटने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है? इसके लिए तीन बड़े आंकड़े समझने जरूरी हैं. वर्ल्ड बैंक का आंकड़ा के अनुसार अक्टूबर 2026 की ‘पाॅवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ इंडिया’ रिपाेर्ट के मुताबिक, 2011-12 में भारत की 57.7 प्रतिशत आबादी 4.20 डाॅलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा से नीचे थी. 2023-24 में यह घटकर 16.1 प्रतिशत रह गई.
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि 2026 में यह 14.2 प्रतिशत और 2028 तक 12.1 प्रतिशत तक गिर जाएगी. यानी करीब एक दशक में 41.6 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से ऊपर आई है. चरम गरीबी का आंकड़ा: वर्ल्ड बैंक की रिवाइज्ड इंटरनेशनल पाॅवर्टी लाइन के मुताबिक, 3 डाॅलर प्रतिदिन के आधार पर भारत में चरम गरीबी 2022- 23 में सिर्फ 5.3 प्रतिशत रह गई. यानी बहुआयामी गरीबी का आंकड़ा नीति आयाेग की रिपाेर्ट बताती है कि देश में बहुआयामी गरीबी 2005-06 के 55.3 प्रतिशत से घटकर 2022-23 में 11.28 प्रतिशत रह गई.