मनपा की 25 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा !

करोड़ों के 60 भूखंड भू-माफियाओं के कब्जे में उद्यान, मैदान, स्कूल समेत सार्वजनिक सुविधाओं का है आरक्षण

    17-Oct-2026
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PCMC 
पिंपरी, 16 अ्नटूबर (आ.प्र.)
शहर में नागरिकाें की सुविधाओं के लिए आरक्षित और भू-अधिग्रहण द्वारा पिंपरीचिंचवड़ मनपा के अधिकार क्षेत्र में लगभग 25 एकड़ क्षेत्रफल के विभिन्न भूखंडाें पर भू-माफियाओं ने कब्ज़ा कर लिया है, यह बात सामने आई है. उद्यान, मैदान, स्कूल, दवाखानाें समेत विभिन्न सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित कराेड़ाें रुपये की ये सार्वजनिक प्राॅपर्टीज अतिक्रमण के घेरे में हैं. प्रशासनिक स्तर पर अतिक्रमण काे हटाने हेतु केवल खाेखले दावे किए जाते हैं. वास्तविक कार्रवाई न हाेने के कारण अतिक्रमणकारियाें का हाैसला बढ़ गया है.
 
शहर की बढ़ती आबादी काे ध्यान में रखते हुए विकास याेजना प्रारूप (डीपी प्लान) में उद्यान, मैदान, खेल के मैदान, रास्ते, स्कूल, अस्पताल, दवाखाने, मार्केट, व्यावसायिक संकुल, फायर ब्रिगेड केंद्र, स्वीमिंग पूल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह आरक्षित की जाती है. कुछ ज़मीनें भू-अधिग्रहण के माध्यम से मनपा के कब्ज़े में ली जाती हैं. इन जगहाें का उपयाेग नागरिकाें की ज़रूरताें काे पूरा करने के लिए किया जाना अपेक्षित है. हालांकि, वास्तव में इन भूखंडाें पर अतिक्रमण हाे रहा है, जिससे शहर की याेजना पर पानी फेर दिया जा रहा है. कुछ दिन पहले स्थायी समिति की बैठक में अतिक्रमण काे लेकर चर्चा हुई थी. उस समय स्थायी समिति के अध्यक्ष अभिषेक बारणे ने आरक्षित भूखंडाें पर अतिक्रमण का सर्वेक्षण कर कार्रवाई करने के स्पष्ट आदेश दिए थे. इसके बाद मनपा के भूमि एवं जिंदगी विभाग ने भू-अधिग्रहण के बाद कब्ज़े में आए और अतिक्रमण किए गए भूखंडाें की जानकारी तैयार की. इसमें कुल 60 भूखंडाें की सूची सामने आई. इन सभी भूखंडाें का कुल क्षेत्रफल 1 लाख 4 हजार 964 स््नवे. मीटर यानी लगभग 25 एकड़ है.
 
यह जानकारी सामने आने के बाद अतिक्रमण का मुद्दा गर्मा गया है और सार्वजनिक प्राॅपर्टी की सुरक्षा का सवाल गंभीर बन गया है. यदि इन जगहाें का समय पर संरक्षण, सीमांकन और विकास कार्य किए गए हाेते, ताे अतिक्रमण पर अंकुश लगाना संभव हाेता. हालांकि, ज़मीन कब्ज़े में आने के बाद भी उनका प्रत्यक्ष उपयाेग शुरू न हाेने के कारण अतिक्रमण बढ़ रहा है.
ऐसा बार-बार कहा जाता है कि मनपा के स्वामित्व वाली और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित जगहाें से अतिक्रमण हटाने पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
 
जानकारी के साथ कार्रवाई के लिए अतिक्रमण विभाग काे भेजा प्रस्ताव मनपा के भूमि एवं जिंदगी विभाग ने शहर के 11 गांवाें के कुल 60 भूखंडाें पर अतिक्रमण की सूची तैयार की है. इसमें माेशी में सबसे ज़्यादा 18 भूखंडाें पर अतिक्रमण है, और कुल अतिक्रमित भूखंडाें में से 30 प्रतिशत भूखंड इसी गांव में हैं.
 
माेशी के बाद चर्हाेली में 13, सांगवी में 10 भूखंडाें पर अतिक्रमण हुआ है. इसके बाद रावेत में 8, भाेसरी में 3, बाेपखेल और चिखली में 2, तथा पिंपले गुरव, आकुर्डी, किवले और तलवड़े में प्रत्येक एक भूखंड पर अतिक्रमण हुआ है. इसमें उद्यान, मैदान, स्कूल, बेघर लाेगाें के लिए घर, पानी की टंकी, श्मशानभूमि, बस स्टैंड, ऑडिटाेरियम, पार्किंग, दवाखाने आदि प्रकार की सार्वजनिक सुविधाओं के आरक्षण शामिल हैं. इन आरक्षणा के कब्ज़े, कुल क्षेत्रफल, उद्देश्य आदि की जानकारी के साथ सूची तैयार कर इन अतिक्रमणाें पर कार्रवाई के लिए अतिक्रमण विभाग काे प्रस्ताव भेजा गया है.
 
भू-माफियाओं काे राजनीतिक शह, अवैध वसूली काे बढ़ावा सार्वजनिक सुविधाओं के लिए आरक्षित जगहाें का निजी उपयाेग किया जाता है. कुछ जगहाें पर पार्किंग या अन्य व्यावसायिक गतिविधियाें के लिए धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जाता है. कुछ भूखंडाें पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है. ऐसा अक्सर कहा जाता है कि इन अतिक्रमण करने वाले भू-माफियाओं काे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है. यह मनपा का नुकसान कर निजी व्यक्तियाें काे आर्थिक लाभ पहुंचाने का मामला है. इससे अवैध वसूली काे बढ़ावा मिल रहा है और प्रशासन के अधिकारी जानबूझकर इस तरफ अनदेखी कर रहे हैं, इसलिए उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं.