महिला पायलटों का सम्मान, मां के योगदान को भी सराहा

श्री महालक्ष्मी ट्रस्ट की ओर से नवरात्रि में नौ दिनों के दौरान नौ विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं सम्मानित

    18-Oct-2026
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सारसबाग, 17 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

 आसमान में विमान उड़ाने वाली महिला पायलटों से लेकर घर पर रहकर अगली पीढ़ी को संवारने वाली महिलाओं तक, हर स्त्री सशक्त और सामर्थ्यवान है. स्त्री का कर्तृत्व और योगदान केवल उसके पेशे से तय नहीं होता, बल्कि दूसरों को उड़ान भरने के लिए संबल देने में भी उसकी अहम भूमिका होती है. मेरे पायलट होने से भी बड़ा काम मेरी मां ने कियहै. उन्होंने हमें पाला-पोसा और उड़ान के लिए पंख दिए्‌‍. सही अर्थों में नारीवाद का मतलब कभी- कभी एक कदम पीछे हटना भी होता है. यह विचार कैप्टगौरी बलकवड़े ने व्यक्त किए्‌‍. वे श्री महालक्ष्मी ट्रस्ट (सारसबाग) की ओर से आयमहिला सम्मान समारोह में बोल रही थ्‌ीं‍. उत्सव के अवसर पर श्री हालक्ष्मी ट्रस्ट (सारसबाग) की ओर से नौ दिनों तक नौ अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मानित कर स्त्री-शक्ति का उत्सव मनाया जाता है. इसी उपक्रम के तहत महिला पायलट कैप्टन लकवड़े, कैप्टन भाद्रवी गडकरी और कैप्टन अपूर्वा गिलजे को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर स्मित मच्छार के साहस को भी सलाम किया गया. कार्यक्रम में पुलिस अधिकारी मिलिंद मोहिते, मंदिर के ट्रस्टी भरत अग्रवाल, उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल, एडवोकेट प्रताप परदेशी और प्रवीण चोरबेले उपस्थित थे. मंदिर के संस्थापक एवं मुख्य ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल और मुख्य ट्रस्टी अमिता अग्रवाल के मार्गदर्शन में यह आयोजन संपन्न हुआ. मिलिंद मोहिते ने कहा कि नवरात्रि के नौ दिन महिलाओं के कर्तृत्व का सम्मान करने का अवसर ह्‌ैं‍. उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मानित करने के ट्रस्ट के इस उपक्रम की सराहना भी की. महिला पायलटों का सम्मान, मां के योगदान को भी सराहा श्री महालक्ष्मी ट्रस्ट की ओर से नवरात्रि में नौ दिनों के दौरान नौ विभिन्न क्षेत्रों की महिलाएं सम्मानित श्री महालक्ष्मी मंदिर (सारसबाग) की ओर से आयोजित सार्वजनिक नवरात्रोत्सव के दौरान छत्रपती शिवाजी महाराज और छत्रपती संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित एक भव्य नाटक ‌‘गाथा शिवशंभूंची‌’ प्रस्तुत किया गया. इस अवसर पर पुणे के नागरिकों ने इस नाट्य अनुभव का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में उपस्थित थे.  
 
महिलाओं के त्याग, संस्कार और पारिवारिक योगदान के महत्व को भी पहचानें

 प्रत्येक महिला, चाहे वह पायलट हो, कामकाजी हो या गृहिणी, अपने भीतर विशेष सामर्थ्य रखती है. स्त्री-शक्ति के इस महत्त्व को पहचानना सबसे जरूरी है. नारीवाद के नाम पर आज हम एक अलग ही दिशा में जा रहे ह्‌ैं‍. महिलाओं की उपलब्धियों और कर्तृत्व का सम्मान करते समय उनके त्याग, संस्कारों और परिवार के लिए दिए गए योगदान के महत्त्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.