मां आशापुरा मंदिर में ‌‘नवदुगार्ओं‌’ का सम्मान

महिलाओं के योगदान की सराहना : पुरस्कारार्थियों ने कहा - महिलाओं के प्रति नजरिया बदलना चाहिए

    19-Oct-2026
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बिबवेवाड़ी, 18 अक्टूबर (आ.प्र.)

मां आशापुरा माता मंदिर ट्रस्ट की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभावान महिलाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. नवरात्रोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में राजनीति, सामाजिक सेवा, स्वास्थ्य, प्रशासन, खेल, गायन और नृत्य जैसे विविध क्षेत्रों में विशेष योगदान देने वाली महिलाओं को शामिल किया गया था. नवदुर्गा पुरस्कार विजेताओं में प्रसिद्ध अभिनेत्री अमृता खानविलकर, अरुंधती महाडिक, डॉ. मेधा पुरव-सामंत, वर्षा लढ्ढा, शमा भाटे, सावनी शेंडे, निवेदिता एकबोटे, सक्षणा सलगर, रंजना बाजी, शुभांगी दलवी, कामाक्षी बर्वे, अनुजा पाटिल, डॉ. ज्योति शिंदे, सुनीति सु.र., वंदना मुले और गंधाली देसाई शामिल थीं. कार्यक्रम में मां आशापुरा माता मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विजय भंडारी, चेतन भंडारी, दिलबाग सिंह बीर, भारती भंडारी, लीना भंडारी, श्याम खंडेलवाल, मंगेश कटारिया, शिल्पा कटारिया, राजेंद्र गोयल के साथ अन्य गणमान्य और नवदुर्गा पुरस्कार समिति के पदाधिकारी उपस्थित थे. शुभम भंडारी ने सभी का स्वागत किया. कार्यक्रम का आयोजन मां आशापुरा माता मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया गया. पुरस्कार विजेता अरुंधती महाडिक ने कहा इस पुरस्कार ने शाबाशी की थपकी दी है. इससे एक नई ऊर्जा मिली है. अभिनेत्री अमृता खानविलकर ने नवदुर्गाओं का सम्मान करने पर ट्रस्ट के कार्यक्रमों की सराहना की. मेधा पुरव-सामंत ने कहा महिलाओं को पुरुषों का साथ और समर्थन मिलना चाहिए. महिला पहले से ही सक्षम है. महिलाएं आज कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं. यदि सरकार को उनका सहयोग मिले, तो समाज में और भी बेहतर तरीके से काम हो सकता है.  
 
महिलाएं घर और परिवार में अच्छे संस्कार दें : वर्षा लड्डा

 कार्यक्रम में राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त (पुणे) वर्षा लड्डा - उंटवाल का भी सम्मान किया गया. पिछले 28 वर्षों से प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वर्षा लड्डा ने अपनी कुशल कार्यशैली से हर विभाग पर अपनी छाप छोड़ी है. महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनका कार्य सराहनीय है. नवदुर्गा सम्मान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, महिला एवं बाल विकास विभाग में काम करते समय मुझे यह महसूस हुआ कि महिलाओं और बच्चों के लिए जो विभिन्न योजनाएं हैं, उन्हें उन तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है.