हांडेवाड़ी, 18 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भविष्य के लिए एक अच्छे निवेश के रूप में कई लोग जमीन, प्लॉट या फ्लैट खरीदते हैं और उसकी रजिस्ट्री करवाते हैं. हालांकि, सिर्फ रजिस्ट्री करवाने से ही आप उस संपत्ति के वास्तविक मालिक नहीं बन जाते. रजिस्ट्री केवल खरीद-बिक्री के लेन-देन का एक प्रमाण होती है. इसलिए, संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व प्राप्त करने के लिए अन्य आवश्यक दस्तावेजों की वैधता की जांच भी जरूर कर लेनी चाहिए. यह सलाह प्रसिद्ध रियल एस्टेट विशेषज्ञ और संतोष ग्रुप के डायरेक्टर संतोष जैन ने दी है. बता दें कि कई लोग प्रॉपर्टी खरीदते ही उसकी रजिस्ट्री करवा लेते हैं और इस भ्रम में रहते हैं कि अब वे उस संपत्ति के पूर्ण मालिक बन गए हैं. लेकिन, न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल रजिस्ट्री के दस्तावेजों से संपत्ति का असली मालिकाना हक सिद्ध नहीं होता. यह रजिस्ट्री केवल इतना दर्शाती है कि आपने पैसे दिए हैं और वह जमीन या मकान खरीदा है. परंतु, इससे यह साबित नहीं होता कि संपत्ति बेचने वाले व्यक्ति के पास उस संपत्ति का वैध और स्पष्ट (साफ) मालिकाना हक था या नहीं. संतोष जैन ने कहा आप आधिकारिक मालिक या मूल मालिक से वह जमीन खरीद रहे हैं या नहीं, यही सबसे महत्वपूर्ण बात होती है. इसे ध्यान में रखकर कदम उठाएं, तो संपत्ति में आपका निवेश सुरक्षित रहता है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संपत्ति के संबंध में भविष्य के किसी भी विवाद से बचने के लिए, रजिस्ट्री (खरेदीखत) से पहले और बाद में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों और प्रविष्टियों की जांच करना अत्यंत आवश्यक है. संतोष जैन बताते हैं कि कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसके पुराने दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला की जांच करना बेहद आवश्यक है. इससे यह स्पष्ट होता है कि पिछले कुछ वर्षों में (लगभग 30 साल) यह संपत्ति किस-किस के नाम पर रही है और हर बार इसका हस्तांतरण किस दस्तावेज के आधार पर हुआ है. यदि इस श्रृंखला की कोई कड़ी गायब हो या दस्तावेज संदिग्ध लगें, तो भविष्य में विवाद पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे विवाद न केवल हमें मानसिक तनाव देते हैं, बल्कि इनसे हमारा निवेश भी खतरे में पड़ सकता है. इंकमब्रेंस सर्टिफिकेट से ग्राहकों को संपत्ति से संबंधित हुए सभी लेन-देन, बैंक लोन, गिरवी (मॉर्गेज) या अन्य वित्तीय बोझ की जानकारी मिलती है. यह जानकारी ग्राहकों के पास होना बहुत जरूरी है, ताकि जमीन खरीदने के बाद अगर उस पर किसी तरह का कर्ज या मॉर्गे ज सामने आता है, तो उसकी परेशानी हमें न उठानी पड़े. संबंधित जमीन की पुरानी वित्तीय देनदारियों या कानूनी स्थिति को जानने में यह प्रमाणपत्र मदद करता है. इसके बावजूद, ‘इंकम्बरेंस सर्टिफिकेट’ (भारमुक्तता प्रमाणपत्र) को सभी प्रकार के विवादों से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता. इसलिए संतोष जैन बताते हैं कि इस प्रमाणपत्र के साथ-साथ अन्य सभी दस्तावेजों व सरकारी रिकॉर्ड की भी जांच पड़ताल करना आवश्यक होता है.
प्रॉपर्टी खरीदते वक्त तीन बातें हमेशा ध्यान में रखें
जमीन, प्लॉट फ्लैट खरीदते समय तीन बातें हमेशा ध्यान में रखें. हम जो जमीन खरीदने जा रहे हैं, उसके मूल मालिकाना हक के दस्तावेज जांच ले, उसी के आधार पर कानूनी तौर पर व्यवहार करें. इसका फायदा यह होता है कि कोई भी जमीन आपको धोखा देकर नहीं बेची जाएगी. साथ ही ‘इंकम्बरेंस सर्टिफिकेट’ देख लें. इससे लोन, मॉर्गेज या अन्य जानकारी मिलती है. जमीन या मकान की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पूरी होते ही, राजस्व और संबंधित नगरपालिका या मनपा के रिकॉर्ड में तुरंत अपना नाम दर्ज करा लें. सरकारी दस्तावेजों में आपका नाम दर्ज होने पर ही आपके नाम से टैक्स की रसीद मिलती है, और उसी के आधार पर आवश्यकता पड़ने पर बैंक से लोन (ऋण) मिल सकता है. - संतोष जैन डायरेक्टर, संतोष ग्रुप
बेवजह विवादों से बचना चाहिए यदि आप किसी फ्लैट या गेटेड सोसाइटी में घर खरीदने जा रहे हैं, तो सोसाइटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना कोई भी भुगतान न करें. सोसाइटी से यह भी लिखित रूप में सुनिश्चित कर लें कि उस घर का कोई मेंटेनेंस बिल, पानी या बिजली का बिल, अथवा अन्य कोई भी बकाया शुल्क लंबित नहीं है. अन्यथा, यह पुराना बकाया पैसा बाद में आपको ही भरना पड़ सकता है, जिससे एक तरफ आपको बेवजह विवादों का सामना करना पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ सकता है.