गुलटेकड़ी, 1 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) बारिश की कमी और धान के बुआई क्षेत्र में आई गिरावट के कारण पारंपरिक बासमती समेत प्रीमियम गैर-बासमती चावल की किस्मों की कीमतें पिछले साल की तुलना में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. पुणे के होलसेल बाजारों में चावल के दाम प्रति किलोग्राम लगभग 10 से 15 रुपये बढ़ गए हैं. इसके अलावा, मजबूत तेजी के संकेत मिल रहे हैं और व्यापारियों का मानना है कि आने वाले कुछ समय में कीमतें कम होने की कोई संभावना नहीं है. पिछले कुछ समय में बासमती चावल का निर्यात काफी बढ़ा है. विशेष रूप से सऊदी अरब, यूएई, ईरान और इराक में भारत से बड़ी मात्रा में बासमती चावल निर्यात किया जा रहा है. हालांकि, व्यापारियों को यह डर भी सता रहा है कि उसकी तुलना में आने वाली नई फसल (चावल) पर्याप्त नहीं होगी. भारत के जिन क्षेत्रों में बासमती चावल उगाया जाता है, वहां अच्छी बारिश न होने के कारण उत्पादन में गिरावट के संकेत हैं. इसका सीधा असर इस समय बाजार में चावल के दामों पर देखा जा रहा है. गैर-बासमती चावल की कीमतों में पिछले 15 दिनों में हुई वृद्धि ने भी व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. विशेष रूप से पुणे के बाजार में अधिक मांग वाले वाडा लचकारी कोलम, ‘मसूरी’ और सोना मसूरी किस्म के चावल के दामों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.व्यापारी बताते हैं कि देश के दक्षिण क्षेत्र में, व्यापक रूप से खाए जाने वाले सोना मसूरी चावल का औसत बाजार मूल्य एक साल पहले के े प्रति किलो से लगभग 25% बढ़कर अब 58 रुपये प्रति किलो हो गया है. वहीं, व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, पूर्वी क्षेत्र में खाए जाने वाले स्वर्णा (उबहुआ) चावल की कलगभग 10% बढ़कर 35 रुपये प्रति किलो हो गई है. विलेषकों का मानना है कि चावल के दामों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण मौसम से जुड़ी आपूर्ति संबंधी चिंताएं हैं. कम मानसून के कारण बांधों में जलस्तर का गिरना, कुछ हिस्सों में बाढ़ और उत्तरी क्षेत्रों में कम बारिश होने से तकलीफ बढ़ी है. वे बताते हैं कि आने वाले महीनों में कीमतों के उतार-चढ़ाव में भूमिका रबी (शीतकालीन) सलों की स्थिति की होगी. वर्तमान खरीप सीजन में चावल का रकबा पिछले सीजन की तुलना में 3.7% घटकर 4.29 करोड़ हेक्टेयर रह गया इस सीजन में मानसून की बारिश में लगभग 26% की कमी के कारण दक्षिण भारत में बढ़ती कीमतों का प्रभाव काफी तेज देखने को मिल रहा है. बासमती की आवक शुरू होते होते पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में भाव 30% अधिक होने की संभावना हैं. पिछले कुछ दिनों में बासमती और गैर-बासमती (बिगर बासमती) चावल के दामों में अचानक बढ़ोतरी हुई है. बाजार में तेजी का माहौल होने के कारण व्यापारियों ने भी सतर्कता और सावधानी से व्यापार करना शुरू कर दिया है.
दुकानदारों के लिए ग्राहक को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती
बासमती और नॉन-बासमती चावल के दाम अगर इसी तरह बढ़ते रहे, तो पिछले 5 वर्षों का रिकॉर्ड टूट सकता है. जो होलसेल व्यापारी क्रेडिट (उधार) पर चावल देते हैं, उन्हें अब बहुत सावधानीपूर्वक व्यापार करना होगा. व्यापार में जोखिम बढ़ गया है. कीमतें बढ़ने के कारण कुल मूल्य बढ़ गया है, जिससे स्वाभाविक रूप से व्यापारियों की बड़ी पूंजी इसमें फंसकर रह जाएगी. पिछले दो हरतों में अचानक बहुत तेजी आई है. हालांकि, चावल के दाम इतने बढ़ जाएंगे, इसकी इस समय उम्मीद नहीं थी. ऐसे में स्वाभाविक तौर पर ग्राहकों को यह समझाना कि ये दाम क्यों बढ़े हैं, और ग्राहकों को अपने साथ बनाए रखना व्यापारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है. मनीष अभय संचेती, बंसीलाल लखीचंद संचेती, मार्केटयार्ड
‘धीरे चलो और सावधानी बरतो’ का मंत्र बहुत जरुरी बिल वसूली के लिए उधार (क्रेडिट) के दिन कम किए जाने की संभावना है. कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव होने के कारण, उधार पर माल देने वाले व्यापारियों को अब सोच-समझकर कदम उठाना होगा. इस साल चावल के व्यापार में बड़ी चुनौतियां दिखाई दे रही हैं, जिसके कारण कुछ व्यापारियों ने ‘धीरे चलो और सावधानी बरतो’ का मंत्र अपनाने का फैसला किया है. कीमतें कम होने की कोई संभावना नहीं होने के कारण, कुछ व्यापारी ग्राहकों को यह सुझाव दे रहे हैं कि वे मौजूदा भाव (वर्तमान कीमत) पर ही चावल खरीद कर रख लें.