प्रत्येक महिला में श्री महाकाली, श्री महालक्ष्मी और श्री महासरस्वती- इन आदिशक्ति के त्रिदेवी स्वरूप का वास होता है. इसलिए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को ‘नारी तू नारायणी’ सम्मान के साथ सराहा गया. इनमें अंतरराष्ट्रीय फेरारी महिला रेसर डायना पंडोल, ऑक्सीजन वुमन सुमेधा चिथडे और सामाजिक कार्यकर्ता सत्यभामा बाबासाहेब देशमाने को श्री महालक्ष्मी मंदिर में सम्मानित किया गया. श्री महालक्ष्मी मंदिर (सारसबाग) द्वारा मंदिर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर महापौर मंजुषा नागपुरे, ट्रस्ट की ट्रस्टी एवं उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल, ट्रस्टी भरत अग्रवाल, एडवोकेट प्रताप परदेशी और प्रवीण चोरबेले आदि गणमान्य उपस्थित थे. कार्यक्रम के बाद इन गणमान्य व्यक्तियों के हाथों देवी की आरती की गई. महापौर मंजुषा नागपुरे ने कहा कई महिलाएं विभिन्न प्रकार के समाजोपयोगी कार्य करती हैं. उनके कार्यों को समाज के सामने लाकर उनका सम्मान करना एक अनूठा उपक्रम है. इससे दूसरों को इससे प्रेरणा मिलती है. संगठन और शक्ति के माध्यम से राष्ट्रहित के लिए कार्य होना चाहिए. सत्यभामा बाबाराव देशमाने ने विचार व्यक्त करते हुए अपनी संघर्षपूर्ण यात्रा के बारे में बताया. गौरतलब है कि सुमेधा चिथडे ‘सोल्जर्स इंडिपेंडेंट रिहैबिलिटेशन फाउंडेशन’ की संस्थापिका हैं. उन्हें ‘ऑक्सीजन वुमन’ के नाम से जाना जाता है. भारतीय महिला कार रेसिंग ड्राइवर डायना पडोल ने भारतीय मोटर स्पोर्ट्स के इतिहास में कई बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं. वहीं परभणी की सत्यभामा बाबाराव देशमाने की पहचान 100 बच्चों की दादी के रूप में है. ‘स्नेहवन’ संस्था के माध्यम से उन्होंने बच्चों का अपने खुद के बच्चों की तरह पालनपोषण किया है. कार्यक्रम का संचालन युवराज लाहोटी ने किया. ... हमें आत्म-केंद्रित होने के बजाय राष्ट्र-केंद्रित होना चाहिए सुमेधा चिथड़े ने कहा देशभक्ति, सेवा व प्रेम की भावना के साथ देश के लिए कार्य करना चाहिए. हम हमेशा उत्सवों के आनंद में रहते हैं, लेकिन उस समय सैनिकों को भी याद रखना चाहिए. हम कितने पैसे कमाते हैं, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि हम सैनिकों को कितना देते हैं. सभी जरूरतमंद वर्गों हेतु काम किया जाता है, लेकिन जिन सैनिकों की वजह से हम हैं, उनका सम्मान बनाए रखने हेतु हमें पहल करनी चाहिए. आत्म- केंद्रित होने के बजाय राष्ट्र-केंद्रित होने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.