श्री महालक्ष्मी काे आज पहनाएंगे सोने की साड़ी

‌‘श्री बंसीलाल रामनाथ अग्रवाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट‌’ द्वारा वर्ष में दो बार यह साड़ी पहनाई जाती है

    21-Oct-2026
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सारसबाग, 19 अक्टूबर (आ.प्र.)

श्री महालक्ष्मी मंदिर (सारसबाग) की ओर से हर साल की तरह इस साल भी आज मंगलवार दशहरा (20 अक्टूबर) के अवसर पर श्री महालक्ष्मी देवी को 16 किलो सोने की साड़ी पहनाई जाएगी. श्री महालक्ष्मी मंदिर सारसबाग, ‌‘श्री बंसीलाल रामनाथ अग्रवाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक ट्रस्ट‌’ की ओर से वर्ष में दो बार यह साड़ी पहनाई जाती है. मंदिर के संस्थापक ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल, प्रमुख ट्रस्टी अमिता अग्रवाल, ट्रस्टी एडवोकेट प्रताप परदेशी, डॉ. तृप्ति अग्रवाल, भरत अग्रवाल, प्रवीण चोरबेले, हेमंत अर्नालकर, नारायण काबरा, नीलेश लद्दड़ आदि ने इस उत्सव का आयोजन किया है. ट्रस्ट की प्रमुख ट्रस्टी डॉ. तृप्ति अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन काल से ही दशहरा के दिन सोना लूटने (शमी के पत्ते बांटने) की परंपरा रही है. उसी परंपरा के अनुसार, श्रद्धालुओं को श्री महालक्ष्मी देवी के दर्शन सोने की साड़ी में हों, इसके लिए दशहरा और लक्ष्मी पूजन के दिन यह साड़ी देवी को पहनाई जाती है. इस साड़ी को तैयार करने का काम लगभग 6 महीने तक चला था. एक भक्त ने देवी को यह साड़ी अर्पित की है. इस साड़ी का वजन पूरे 16 किलोग्राम है. यह सोने की साड़ी आकर्षक नक्काशी और कारीगरी के साथ बनाई गई है. इसलिए, श्री महालक्ष्मी देवी का स्वर्ण वस्त्रों में यह रूप देखने के लिए हर साल भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. प्रमुख ट्रस्टी डॉ. तृप्ति अग्रवाल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि महालक्ष्मी को यह सोने की साड़ी मंदिर प्रशासन की ओर से अर्पित की गई है. कर्नाटक के कारीगरों ने छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद बनाई हुई यह 16 किलो वजन की साड़ी साल में दो बार महालक्ष्मी देवी को पहनाई जाती है- एक दशहरा (विजयादशमी) के अवसर पर और दूसरी दीपावली में लक्ष्मी पूजन के दिन.  
 
वर्ष भर में मनाए जाने वाले उत्सव

ब्रह्मोत्सव: इस अवसर पर 108 कलशों से श्री देवी की मूर्ति का अभिषेक किया जाता है. इसमें विभिन्न प्रकार के फलों के रस, गन्ने का रस, केसर युक्त दूध और पंचामृत देवी को अर्पित किए जाते हैं.
अक्षय तृतीया : इस दिन मंदिर की विशेष सजावट की जाती है और वसंतोत्सव मनाया जाता है. इस अवसर पर तीनों देवताओं को मोगरे के फूलों से सजाया जाता है. मुख्य रूप से इस समय ‌‘मोगरा उत्सव‌’ ही आयोजित किया जाता है.
कोजागरी पूर्णिमा: इस अवसर पर मंदिर में भजन आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इस समय भी देवताओं का सुंदर श्रृंगार किया जाता है और पूरे मंदिर को दीयों की रोशनी से सजाया जाता है. देवताओं और भक्तों को लगभग 56 प्रकार के शाकाहारी व्यंजन (भोग) अर्पित करके मंदिर में अन्नकूट का आयोजन किया जाता है.
गोवर्धन पूजा: भक्तगण देवताओं के प्रति धार्मिक श्रद्धा व्यक्त करते हुए अन्न से निर्मित गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाकर अर्पित करते हैं.  
 
 आज रात 9 बजे मंदिर के सामने सांकेतिक रावण दहन किया जाएगा

 विभिन्न सामाजिक समस्याओं के सांकेतिक रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन मंदिर के सामने रात 9 बजे किया गया है. इस अवसर पर लगभग 25 फीट ऊंचे सांकेतिक रावण का दहन किया जाएगा. इस सांकेतिक रावण दहन के माध्यम से समाज में महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया जाएगा. प्रमुख ट्रस्टी अमिता अग्रवाल ने पुणेवासियों से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित रहने की अपील की है.