नर्हे, 21 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
विधि (कानून) के क्षेत्र में करियर के कई अवसर उपलब्ध हैं. बदलते समय के साथ समाज के विभिन्न क्षेत्रों का दायरा कानून के अंतर्गत बढ़ रहा है. इसलिए छात्रों को कानून का गहराई से अध्ययन करना चाहिए और इस क्षेत्र के अवसरों व व्यावसायिक जिम्मेदारियों को समझना और उस पर काम करना चाहिए. यह अपील झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश कुमार ने की. जाधवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स की ओर से ‘कानूनी पेशा और करियर के अवसर’ विषय पर आयोजित दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में वे मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. यह कार्यक्रम संस्थान के नर्हे स्थित शैक्षणिक परिसर में आयोजित किया गया था. इस अवसर पर मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीकांत कुलकर्णी, पुणे पारिवारिक न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस.एन. रुक्मे, सावित्रीबाई फुले पुणे वेिशविद्यालय के प्र-कुलपति डॉ. पराग कालकर, जाधवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के उपाध्यक्ष एडवोकेट शार्दुल जाधवर और विभागाध्यक्ष डॉ. सपना देव उपस्थित थे. कार्यक्रम में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा की उपाध्यक्ष एडवोकेट रंजना भोसले, पूर्व अध्यक्ष एवं सदस्य एडवोकेट विट्ठल कोंडे देशमुख, सदस्य एडवोकेट अहमदखान पठान, सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट राजेंद्र बाबूराव उमाप, सदस्य एडवोकेट राजेंद्र अनभुले, सदस्य एडवोकेट विकास ढगे पाटिल, एडवोकेट माधवी बाल पोतदार और एडवोकेट गणेश शिरसाट इन नवनियुक्त पदाधिकारियों का सम्मान किया गया. न्यायमूर्ति श्रीकांत कुलकर्णी ने कहा, सफलता पाने की इच्छा, सही और न्यायसंगत बातों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता से बड़ी नहीं होनी चाहिए. दबाव में आए बिना या शॉर्टकट के लालच में पड़े बिना कानून के पेशे के बुनियादी सिद्धांतों का पालन करना आवश्यक है. न्यायमूर्ति एस. एन. रुक्मे ने कहा, समाज को स्वस्थ और समृद्ध बनाने के लिए एक आदर्श समाज का निर्माण होना आवश्यक है. यदि वकील इसके लिए आगे आएं और पहल करें, तो आदर्श समाज के निर्माण की प्रक्रिया और अधिक तेज हो सकती है. एड. शार्दुल जाधवर ने कहा, कानून की डिग्री केवल एक शैक्षणिक योग्यता नहीं है, बल्कि समाज और देश के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है. छात्रों को इस बात का अहसास होना चाहिए.