महालक्ष्मी मंदिर ने रावण दहन कर दिया बुराइयों के अंत का संदेश

महिला अत्याचार, भ्रूण हत्या और नशाखोरी जैसी कुरीतियों को हटाने का लिया संकल्प, जीवंत झांकियां बनी आकर्षण का केंद्र

    22-Oct-2026
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 सारसबाग, 21 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

महिला अत्याचार, कन्या भ्रूण हत्या, बाल शोषण समेत विभिन्न सामाजिक समस्याओं के प्रतीकात्मक रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन सारसबाग के सामने स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर के पास मंगलवार, 20 अक्टूबर की रात को किया गया. इस अवसर पर भगवान श्रीराम की वानर सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध का जीवंत प्रसंग और संपूर्ण रामायण का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया गया. रावण की भव्य हिलने-डुलने वाली प्रतिकृति और जीवंत झांकी में हनुमान तथा जटायू इस वर्ष के प्रमुख आकर्षण रहे. श्री महालक्ष्मी मंदिर (सारसबाग) द्वारा मंदिर के सामने प्रतीकात्मक रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस अवसर पर लगभग 25 फीट ऊंचे प्रतीकात्मक रावण का दहन किया गया. ट्रस्ट के मुख्य संस्थापक और ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल, मुख्य ट्रस्टी अमिता अग्रवाल, ट्रस्टी एडवोकेट प्रताप परदेशी, ट्रस्टी एवं उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल, ट्रस्टी भरत अग्रवाल, प्रवीण चोरबेले, हेमंत अर्नालकर, नारायण काबरा, राजेश सांकला, रमेश पटोदिया, राजकुमार चमडिया और नीलेश लद्दड सहित अन्य पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं ने इस वर्ष के उत्सव का आयोजन किया. 
 
‌‘रावण दहन‌’ कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया

उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल ने कहा कि इस वर्ष आयोजित ‌‘रावण दहन‌’ कार्यक्रम में महिला अत्याचार और स्त्री भ्रूण हत्या जैसी समस्याओं के प्रतीकात्मक रावण का दहन करके समाज में महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया गया. साथ ही समाज में व्याप्त बुरे विचार और नशाखोरी जैसी कुप्रवृत्तियों रूपी रावण का भी दहन किया गया. विश्वकर्मा विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और पदाधिकारियों ने इस पहल में बढ़-चढ़कर भाग लिया. साथ ही, इस वर्ष पहली बार आयोजित स्वास्थ्य शिविर और रक्तदान शिविर में भी भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह के साथ बड़ी संख्या में भाग लिया.  
 
 देवी को 16 किलो सोने की साड़ी अर्पित
  सारसबाग स्थित महालक्ष्मी मंदिर में देवी को आकर्षक कलाकारी से सजी 16 किलो सोने की साड़ी और लगभग 2 किलो सोने का रत्न जड़ित मुकुट दशहरे के अवसर पर अर्पित किया गया. जिसके दर्शन हेतु भक्तों का तांता लगा रहा. मंदिर में दशहरा और लक्ष्मी पूजन पर देवी को यह साड़ी पहनाई जाती है. ट्रस्ट के प्रमुख संस्थापक एवं ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल, प्रमुख ट्रस्टी अमिता अग्रवाल, ट्रस्टी एडवोकेट प्रताप परदेशी, ट्रस्टी व उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल, ट्रस्टी भरत अग्रवाल, प्रवीण चोरबेले, हेमंत अर्नालकर, नारायण काबरा, राजेश सांकला, रमेश पटोदिया, राजकुमार चमडिया, नीलेश लद्दड सहित अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इस वर्ष के उत्सव का आयोजन किया है. प्रमुख ट्रस्टी अमिता अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन काल से दशहरा के दिन सोना लूटने (शमी के पत्ते बांटने) की परंपरा रही है. उसी परंपरा के अनुसार, श्रद्धालुओं को श्री महालक्ष्मी देवी का दर्शन सोने की साड़ी में हो सके, इसलिए देवी को यह साड़ी पहनाई जाती है. उत्सव प्रमुख डॉ. तृप्ति अग्रवाल ने कहा कि लगभग 2 किलो सोने के मुकुट पर की गई बेहद सुंदर और नाजुक नक्काशी विशेष रूप से आकर्षक है.
 
 
 
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