अहमदाबाद, 23 अक्टूबर (आ.प्र.)
दीपावली से कुछ ही सप्ताह पहले गुजरात का औद्याेगिक तंत्र एक बड़े बिजली संकट का सामना कर रहा है, क्याेंकि आठ घंटे के बिजली बंद के निर्देश से दक्षिण गुजरात में उत्पादन, वितरण कार्यक्रम और व्यावसायिक प्रतिबद्धताएं खतरे में पड़ गई हैं.
पिछले 15 वर्षाें में पहली बार, यह क्षेत्र गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है, जिससे उद्याेगाें काे त्याेहारी माैसम के चरम पर अपने संचालन काे पुनर्व्यवस्थित करने के लिए मजबूर हाेना पड़ रहा है. दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) ने चेतावनी दी है कि इस व्यवधान से हजाराें कराेड़ रुपये का नुकसान हाे सकता है और औद्याेगिक क्षेत्र में लगभग 25 लाख श्रमिकाें की आजीविका खतरे में पड़ सकती है. उन्हाेंने गुजरात के मुख्यमंत्री काे एक पत्र भी लिखा है.
निर्धारित अवकाशाें पर शाम 4 बजे से आधी रात तक बिजली आपूर्ति बंद रहने के कारण नवसारी जीआईडीसी की 250 से अधिक छाेटी और बड़ी औद्याेगिक इकाइयां अनिश्चितता का सामना कर रही हैं. ऐसे में यह समय इससे बुरा नहीं हाे सकता था. सूरत-दक्षिण गुजरात क्षेत्र में कपड़ा, हीरा, विनिर्माण और अन्य उद्याेग कराेड़ाें रुपये के दीपावली ऑर्डर पूरे करने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा करने की हाेड़ में लगे हैं. इस संकट के पीछे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काेयले और गैस की बढ़ती कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, काेयले की कमी, उम्मीद से कम पवन ऊर्जा उत्पादन और बांधाें में घटता जलस्तर जैसे कई कारक हैं. बिजली उत्पादन मांग के अनुरूप नहीं हाे पा रहा है, ऐसे में उद्याेगाें काे निर्धारित बिजली कटाैती के माध्यम से इस बाेझ काे वहन करने के लिए कहा गया है.
बिजली संकट ऐसे समय में आया है जब कारखाने परंपरागत रूप से पूरी क्षमता से काम करते हैं, अक्सर त्याेहाराें के दाैरान बढ़ी मांग काे पूरा करने के लिए चाैबीसाें घंटे चलते रहते हैं. लेकिन, इस साल, उद्याेगपतियाें काे अपने उत्पादन कार्यक्रम पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर हाेना पड़ रहा है क्याेंकि बिजली प्रतिबंधाें के कारण शाम और रात के महत्वपूर्ण घंटाें के दाैरान उत्पादन ठप्प हाेने का खतरा है. यह व्यवधान पहले से ही कठिन परिचालन वातावरण में एक और समस्या खड़ी कर देता है. औद्याेगिक इकाइयां कच्चे माल की कमी, कुशल श्रमिकाें की अनुपलब्धता और वायु प्रदूषण प्रतिबंधाें तथा गैस आपूर्ति से संबंधित चुनाैतियाें से जूझ रही हैं. अब, बिजली की कमी ने एक और बाधा खड़ी कर दी है, जिससे व्यवसायाें पर समय पर ऑर्डर पूरा करने का दबाव बढ़ता जा रहा है.
ये प्रतिबंध निर्धारित छुट्टियाें पर भी लागू हाेंगे, जिससे उन कारखानाें काे, जाे सामान्यतः 24 घंटे काम करते हैं, अपनी शिफ्टाें काे पुनर्गठित करने, उत्पादन काे आगे बढ़ाने और कार्यबल की समय-सारणी काे समायाेजित करने के लिए मजबूर हाेना पड़ेगा.