वैश्विक परिस्थितियों के कारण चांदी 2 लाख के नीचे आई

दोनों धातुओं की कीमतों में भारी गिरावट : विशेषज्ञों ने कहा- ग्राहकों व निवेशकों के लिए बेहतरीन अवसर

    24-Oct-2026
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कर्वे रोड, 23 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

दुनिया भर में चल रही अलग-अलग घटनाओं का असर सराफा बाजार पर देखने को मिल रहा है. चांदी की कीमत एक बार फिर 2 लाख रुपये के नीचे पहुंच गई है, वहीं सोने की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है. बहुमूल्य धातुओं की कीमतें कम होने से एक तरफ जहां चिंता बढ़ गई है, वहीं दूसरी तरफ विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट ग्राहकों और निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर है. अगर पिछले एक महीने पर नजर डालें, तो सोने के दाम पूरे दस हजार रुपये और चांदी के दाम करीब चालीस हजार रुपये कम हो गए हैं. पिछले बीस दिनों में सोने की कीमतों में 4 प्रतिशत, जबकि चांदी में 15 प्रतिशत की गिरावट आई है. अगर पिछले दो महीनों की बात करें, तो सोने के दाम 13 प्रतिशत और चांदी के दाम पूरे 28 प्रतिशत तक गिर चुके हैं. वर्ष 2026 के पहले ही महीने में सोने और चांदी ने अब तक का उच्चतम स्तर दर्ज किया था. उस समय यानी 30 जनवरी 2026 से लेकर अब तक, पिछले 10 महीनों में सोने की कीमतें 17 प्रतिशत तक नीचे आ गई हैं, जबकि चांदी में चिंताजनक रूप से 45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. पुणे के सर्राफा बाजार में शुक्रवार, 23 अक्टूबर को 10 ग्राम सोने का भाव 1 लाख 41 हजार रुपये और चांदी का भाव 1 लाख 95 हजार रुपये रहा. जीएसटी सहित विचार करें तो, 10 ग्राम सोना खरीदने के लिए ग्राहकों को 1 लाख 45 हजार 700 रुपये और एक किलो चांदी खरीदने के लिए 2 लाख 850 रुपये चुकाने पड़े. दुनियाभर में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम बढ़ रहे हैं. इसका परिणाम यह है कि अन्य सभी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ती जा रही हैं. महंगाई बढ़ रही है. दूसरी ओर अमेरिकी बॉन्ड आकर्षक होने के कारण लोगों ने अन्य सभी निवेशों से पैसे कम करके अमेरिकी बॉन्ड में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है. निवेशकों द्वारा कीमती धातुओं (सोने-चांदी) की लगातार हो रही बिक्री से बाजार में उनकी आपूर्ति बढ़ गई है. इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हो रहा है. यूएस बॉन्ड में अच्छा रिटर्न मिलने के कारण लोग किसी अन्य निवेश की तुलना में इन बॉन्ड्स की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं. कई लोगों के मन में यह डर भी बना हुआ है कि सोने और चांदी की कीमतें इससे भी अधिक गिर सकती हैं. स्वाभाविक रूप से, इस तरह के सौदों में होने वाले संभावित नुकसान को कम करने के लिए कुछ लोगों ने मुनाफा कमाने (प्रॉफिट बुकिंग) के लिए भी सोना और चांदी बेचना शुरू कर दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की घटती कीमतें, कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के बढ़ते दाम और अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना- ये सभी मुख्य कारण सोने-चांदी के भाव कम होने के लिए जिम्मेदार हैं. इसके अलावा, वर्तमान में भारत में भी सोने और चांदी की मांग में कमी आई है. ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के बादल एक बार फिर गहरे होने लगे हैं. कई विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार भीषण युद्ध हो सकता है. लोगों के मन में इसका डर भी बना हुआ है. कई विश्लेषकों का मानना है कि इसी डर की वजह से लोगों का रुझान पैसे बचाकर रखने की ओर हो सकता है. आसान भाषा में लोगों की मानसिकता का विश्लेषण बताता है कि आपातकालीन स्थिति पैदा होने पर कई लोगों की यह इच्छा होती है कि कुछ निवेशों में पैसा फंसाने के बजाय उनके हाथ में नकदी (कैश) रहे और उनके पास तरलता (लिक्विडिटी) बनी रहे. इसी वजह से कुछ लोगों ने निवेश करना कम कर दिया है. युद्ध की स्थिति, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, आर्थिक अस्थिरता जैसी खबरों के कारण लोगों के मन में डर का माहौल बन जाता है. इन खबरों का सीधा असर ग्राहकों की मानसिकता पर पड़ता है. इसलिए, विश्लेषक सलाह देते हैं कि ऐसी किसी भी खबर पर तुरंत विश्वास करके या उसे सुनकर कोई भी तीव्र प्रतिक्रिया देने के बजाय, ग्राहकों को खरीदारी या बिक्री का फैसला लेते समय थोड़ा इंतजार करना चाहिए.  
 
सोने का भाव कम होना ग्राहकों के लिए फायदेमंद होगा

जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) कारणों की वजह से सोने के भाव कम हो रहे हैं. उस हिसाब से यह ग्राहकों के लिए बहुत फायदेमंद रहेगा. यह रेट टिकने वाला है, इसमें बहुत ज्यादा फर्क पड़ने वाला नहीं है, बल्कि हो सकता है थोड़ा और कम हो जाए. इस दीपावली सोना और चांदी दोनों में निवेश के लिए यह सबसे बेहतरीन मौका है और ग्राहकों की तरफ से शुद्ध (प्योर) सोने की अच्छी डिमांड है. अभी के भावों में गिरावट परसेंटेज के हिसाब से बहुत ज्यादा नहीं है. थोड़ा बढ़ने के बाद दाम एकदम से कम नहीं होते हैं. लेकिन 5 से 10 परसेंट की जो गिरावट हुई है, वह हर मार्केट का एक करेक्शन (सुधार) होता है. थोड़ा उतार-चढ़ाव चलता रहता है, कभी-कभार यह समय खरीदारी का हो सकता है. जिनकी खरीदारी पहले छूट गई हो या जिन्हें अपने भाव एवरेज (औसत) करने हों, उनके लिए खरीदारी करने का यह सबसे सही समय है. - राजेश सोनी, निदेशक, एच. पी. ज्वेलर्स, लुल्ला नगर
 

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कीमतों में थोड़ी गिरावट आना लोगों को अपेक्षित था

पिछले एक वर्ष में सोने और चांदी के रुझान को देखें, तो उसमें हुई मूल्य वृद्धि पूरी तरह से एकतरफा थी. इसलिए, कीमतों में थोड़ी गिरावट आना अपेक्षित ही था. फिलहाल कीमतों में आई गिरावट मुख्य रूप से क्रूड ऑयल के दामों में हुई बढ़ोतरी से जुड़ी हुई है. अमरीका में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, और वहां निवेश करना सोने की तुलना में अधिक आकर्षक लग रहा है, जिससे निवेशकों की पहली पसंद अमरीकी बॉन्ड बने हुए हैं. वहीं, कुछ निवेशक अपना मुनाफा वसूलने के लिए सोना बेच रहे हैं. भारत में खरीदारी मुख्य रूप से त्योहारों या घर के शुभ अवसरों के लिए होती है. मुझे लगता है कि इस समय जो कीमतें कम हो रही हैं, वह खरीदारी का एक बेहतरीन अवसर है. सोने-चांदी के दाम कम होने पर मेकिंग चार्ज और ग्रामेज (वजन) दोनों ही मामलों में ग्राहकों को फायदा मिल सकता है. - वास्तुपाल रांका, संचालक, रांका ज्वेलर्स, कर्वे रोड
 

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ग्राहकों को सोना-चांदी खरीदने का अभी अच्छा समय

जिनके यहां शादी-ब्याह का कार्य हो, ऐसे लोगों के लिए इस समय सोना-चांदी खरीदने का अच्छा समय है. काफी दिनों से सोने के भाव प्रति 10 ग्राम डेढ़ लाख रुपए के आसपास थे. अगर वे भाव अब कम हो रहे हैं, तो यह ग्राहकों के लिए एक अच्छा मौका है, ऐसा मुझे लगता है. भविष्य में सोने के भाव बढ़ सकते हैं, उस समय अभी की गई खरीदारी का फायदा जरूर मिल सकता है. चांदी के भाव में भी बहुत बडी गिरावट होने से लोगों में उत्साह है. - सुशीला केडिया, गृहिणी, पुणे
 

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 कीमतों में भारी कमी आने से निवेशकों में चिंता

पिछले बीस दिनों में सोने की कीमत में 4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि चांदी में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. पिछले दो महीनों में सोने के दाम 13 प्रतिशत नीचे आए, तो वहीं चांदी भी 28 प्रतिशत तक गिर गई. वर्ष 2026 में 30 जनवरी से लेकर केवल 10 महीनों में सोने की कीमतों में भारी 17 प्रतिशत की गिरावट आई. वहीं चांदी में चिंताजनक 45 प्रतिशत की गिरावट देखी गई.
 
कच्चा तेल और यूएस बॉन्ड लग रहे अधिक आकर्षक

कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं. ऐसी स्थिति में यह संभावना जताई जा रही है कि सोने की तुलना में कच्चे तेल में निवेश से अधिक अच्छा रिटर्न मिल सकता है. इसीलिए कई लोग लाभदायक निवेश के लिए सोने-चांदी के बजाय क्रूड ऑयल को तरजीह (पसंद) दे रहे हैं. इसके अलावा, अच्छे रिटर्न के अनुमान से अमेरिकी बॉन्ड में भी निवेश बढ़ने लगा है. इन सभी कारणों के मिले-जुले प्रभाव से, फिलहाल निवेशकों को सोना और चांदी उतने आकर्षक नहीं लग रहे हैं.