पुणे, 23 अक्टूबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भांडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्य पर आधारित डिजिटल डॉक्यूमेंट्री फिल्म की एक प्रिंट नेशनल फिल्म आर्काइव द्वारा भांडारकर इंस्टीट्यूट को सम्मान के साथ सौंपी गई. यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म मशहूर प्रोड्यूसर दिनकर जोशी ने 1967 में इंस्टीट्यूट की गोल्डन जुबली के मौके पर बनाई थी. नानी शहापुरकर इसके दिग्दर्शक थे. उस समय मशहूर रिसर्चर पद्मभूषण डॉ. आर.एन.दांडेकर भांडारकर इंस्टीट्यूट के मानद सचिव थे. सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सेंसर बोर्ड) से 1969 में पास हुई डॉक्यूमेंट्री का यह ऐतिहासिक खजाना नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक प्रकाश मगदुम ने इंस्टीट्यूट के कार्याध्यक्ष भूपाल पटवर्धन को सौंपा. इस मौके पर चित्रपट संग्रहालय के व्यवस्थापक भावेश सिंह, भांडारकर इंस्टीट्यूट के व्यवस्थापन सदस्य सुनील भंडगे, मनोज एरंडे, वरिष्ठ लेखक डॉ. सदानंद मोरे मौजूद थे. इंग्लिश डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग के चश्मदीद रहे सीनियर रिसर्चर डॉ. जी. यू. थिटे ने बताया कि, उस वक्त तीनचार दिन डॉक्यूमेंट्री का काम चल रहा था. इंस्टीट्यूट के रजिस्ट्रार डॉ. श्रीनंद बापट ने बताया कि अभी जो नेशनल फिल्म आर्काइव है, वह जगह डॉ. एम. आर.जयकर की है. डॉ.जयकर उस समय की पुणे विश्वविद्यालय के पहले कुलगुरू थे. उस समय, पुणे विश्वविद्यालय की स्थापना 1949 में भांडारकर इंस्टीट्यूट की जगह पर हुई थी. इसलिए, डॉ. जयकर, फिल्म आर्काइव और भांडारकर इंस्टीट्यूट के बीच पुराने रिश्ते हैं. इस डॉक्यूमेंट्री की 35 एम.एम. रील की कॉपी दिनकर जोशी ने 2003 में भांडारकर इंस्टीट्यूट को दी थीं, और बाद में 2008 में उन्हें ठीक से संभालकर रखने के लिए फिल्म आर्काइव को दे दिया गया था. इस डॉक्यूमेंट्री के अलावा, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ने इंस्टीट्यूट के बारे में दो फिल्में भी बनाई हैं, जिन्हें भी खोजने की जशरत है. इस मौके पर भूपाल पटवर्धन ने कहा कि इंस्टीट्यूट के कई दुर्लभ खजानों का डिजिटलाइजेशन चल रहा है, जिसके लिए हम चित्रपट संग्रहालय का सहयोग चाहते हैं. इंस्टीट्यूट के ज्ञानभारतम केंद्र की समन्वयक डॉ. वीणा राज ने इस डॉक्यूमेंट्री के डिजिटलाइजेशन की पहल की थी, उन्होंने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया.